भीलवाड़ा में अरावली की नई परिभाषा पर गहरा आक्रोश, राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा
भीलवाड़ा में ‘जन चेतना जन अधिकार संस्था’ ने अरावली की नई परिभाषा पर गहरा आक्रोश जताया। महेश सोनी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पुनर्विचार और अरावली संरक्षण की अपील की।

भीलवाड़ा। राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर ‘जन चेतना जन अधिकार संस्था’ ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संस्था के अध्यक्ष महेश सोनी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की और अरावली के संरक्षण को सुनिश्चित करने की अपील की।
सचिव एडवोकेट ईश्वर खोईवाल ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अरावली क्षेत्र की नई गणना में 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को बाहर करने के फैसले से अवैध खनन और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। संस्था का मानना है कि वैज्ञानिक संरक्षण के अभाव में यह निर्णय राजस्थान को मरुस्थलीकरण की ओर धकेल सकता है।
महेश सोनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अरावली का अस्तित्व संकट में पड़ने पर इसके विनाशकारी परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने बताया कि इससे जल पुनर्भरण की प्राकृतिक प्रक्रिया रुक जाएगी, थार का रेगिस्तान पूर्व की ओर बढ़कर उपजाऊ भूमि को निगल जाएगा और वनों एवं वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे।
संस्था ने जिला प्रशासन से अपील की कि इस निर्णय को लागू करने से पहले गहन पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कराया जाए। साथ ही अरावली क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन और अनियंत्रित निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके लिए पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों को शामिल करते हुए एक विशेष निगरानी समिति का गठन किया जाए और अरावली संरक्षण हेतु राज्य एवं केंद्र सरकार को नीतिगत अनुशंसा भेजी जाए।
ज्ञापन सौंपने के अवसर पर दुर्गेश शर्मा, रामगोपाल पुरोहित, मधु जाजू, सुमित्रा कांटिया, रेखा हिरण, आशीष राजस्थला, अविचल व्यास, संजय मेवाड़ा, मोहसिन अली मंसूरी, बकसू जाट, सुभाष झंवर, लक्ष्मण लोट, कश्मीर शेख, खुर्शीद मंसूरी, राजू डीडवानिया, संजय हिरन, रामदयाल बलाई, प्रकाश पीतलिया, विनोद सुथार, लाजपत आचार्य और राकेश दाधीच सहित अरविंद सिंह उपस्थित थे।
अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं, बल्कि राजस्थान का रक्षा कवच है। यदि इसके संरक्षण पर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल और पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ेगा।
- भीलवाड़ा अरावली संरक्षण ज्ञापनजन चेतना जन अधिकार संस्था अरावलीमहेश सोनी अरावली संरक्षणअरावली नई परिभाषा विवादअरावली सुप्रीम कोर्ट निर्णयअरावली अवैध खनन रोकअरावली पर्यावरणीय संकट राजस्थानभीलवाड़ा पर्यावरण जागरूकताअरावली पर्वतमाला खतराराजस्थान जल संकट अरावलीBhilwara Aravalli protection memorandumJan Chetna Jan Adhikar Sanstha AravalliMahesh Soni Aravalli conservationAravalli new definition controversyAravalli Supreme Court decisionAravalli illegal mining preventionAravalli environmental crisis RajasthanBhilwara environmental awarenessAravalli mountain range threatRajasthan water crisis Aravalli

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
