भीलवाड़ा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले नर्सिंग और पेरा मेडिकल कार्मिकों का सब्र अब जवाब देने लगा है। वर्षों से संविदा, निविदा और अल्पवेतन पर सेवाएं दे रहे इन कार्मिकों ने नियमित भर्ती की मांग को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर राज्य सरकार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

प्रदर्शन कर रहे कार्मिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे लंबे समय से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज भी अस्थायी कर्मचारी के रूप में कार्य करने को मजबूर हैं। नियमित भर्ती की प्रक्रिया वर्षों से लंबित रहने के कारण उनका भविष्य असुरक्षित होता जा रहा है। कई कार्मिक ऐसे भी हैं जो उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके हैं, ऐसे में यदि शीघ्र भर्ती नहीं हुई तो वे सरकारी सेवा के अधिकार से वंचित रह जाएंगे।

कार्मिकों ने ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार से मांग की कि नर्सिंग ऑफिसर के 12 हजार पदों, पेरा मेडिकल के 10 हजार पदों तथा महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता एएनएम के 7 हजार पदों पर शीघ्र नई सीधी नियमित भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि वर्ष 2018 और 2023 की भर्ती प्रक्रियाओं की तर्ज पर तथा चिकित्सा नियम 1965 के अंतर्गत भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की जाए, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे संविदा कार्मिकों को न्याय मिल सके।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग रखी कि आगामी भर्ती में मेरिट के साथ 10, 20 और 30 बोनस अंकों का प्रावधान किया जाए, जिससे वर्षों का अनुभव रखने वाले संविदा नर्सिंग और पेरा मेडिकल कार्मिकों को प्राथमिकता मिल सके। उनका कहना था कि अनुभव और सेवा के आधार पर बोनस अंक देना न केवल न्यायसंगत है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।

कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर हुए इस प्रदर्शन ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज हो सकता है। नियमित भर्ती की मांग अब केवल रोजगार का प्रश्न नहीं, बल्कि हजारों स्वास्थ्य कर्मियों के भविष्य और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिरता से जुड़ा अहम मुद्दा बन चुकी है।


Pratahkal Bureau

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