भीलवाड़ा। जेल की ऊँची दीवारों के पीछे बंद कैदियों के मानवाधिकार और उनके स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति क्या है, इसे लेकर आज उपभोक्ता अधिकार समिति की केंद्रीय टीम ने भीलवाड़ा जिला जेल का औचक निरीक्षण कर हड़कंप मचा दिया। उपभोक्ता हितों और सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित इस समिति ने जेल की सलाखों के पीछे की स्वच्छता, चिकित्सा और सुरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से विश्लेषण किया, जिससे जेल प्रशासन और नागरिक समाज के बीच एक सीधा संवाद स्थापित हुआ। यह दौरा महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि जेल सुधार की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में देखा जा रहा है।

समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सुनील राठी और केंद्रीय महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष व पूर्व सभापति मधु जाजू के नेतृत्व में पहुँची इस टीम ने जेल परिसर की सघन जांच की। निरीक्षण के दौरान टीम ने जेलर हीरालाल के साथ लंबी मंत्रणा की, जिसमें बंदियों को मिलने वाले आहार की गुणवत्ता, चिकित्सा सुविधाओं की सुलभता और परिसर की स्वच्छता जैसे संवेदनशील मुद्दों को केंद्र में रखा गया। जेलर हीरालाल ने समिति के हर तीखे और जरूरी सवाल का जवाब पूरी पारदर्शिता के साथ दिया और वर्तमान में कैदियों के पुनर्वास के लिए संचालित विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की।

निरीक्षण के दौरान सुरक्षा के एक महत्वपूर्ण पहलू पर भी चर्चा हुई। जेलर हीरालाल ने जेल परिसर के कुछ संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा और निगरानी को पुख्ता करने के उद्देश्य से प्रकाश व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने का प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा। उन्होंने जेल में अतिरिक्त हैलोजन लाइटें लगवाने का निवेदन किया, ताकि रात्रि के समय सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न रहे। समिति के पदाधिकारियों ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए जेल प्रशासन को जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने और सहयोग करने का आश्वासन दिया।

इस उच्चस्तरीय निरीक्षण दल में मानवाधिकारों के प्रति सजग पदाधिकारियों की बड़ी फौज मौजूद रही। घटना के दौरान अशोक सोडाणी (केंद्रीय मानवाधिकार अध्यक्ष), अर्चना दुबे (महिला जिला अध्यक्ष), अशोक सोमानी, अंकित सोमानी (युवा मोर्चा), हार्दिक सोनी, त्रिदेव मूंदड़ा, हर्ष राठी और लादूराम वैष्णव सहित समिति के अन्य कई सदस्य सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। इन सभी सदस्यों ने अलग-अलग खंडों का जायजा लेकर यह सुनिश्चित किया कि जेल की व्यवस्थाएं तय मानकों के अनुरूप हों। यह दौरा इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि सुधार की प्रक्रिया में समाज और प्रशासन का समन्वय ही बंदियों के मानवाधिकारों को सुरक्षित रख सकता है।

Pratahkal Bureau

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