भीलवाड़ा में गरजा कांग्रेस का 'मनरेगा बचाओ' आंदोलन: केंद्र की नीतियों के खिलाफ रामलाल जाट ने फूंका बिगुल, मजदूरों के हक के लिए आर-पार की लड़ाई का एलान
भीलवाड़ा में जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामलाल जाट के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों और मनरेगा को कमजोर करने की साजिशों के खिलाफ 'मनरेगा बचाओ जनआंदोलन' के तहत जोरदार प्रदर्शन किया गया। छापरी, बड़ा महुआ और सुवाना जैसी पंचायतों में सभाएं कर कांग्रेस ने मजदूरों के समय पर भुगतान और ब्याज की मांग उठाई। इस ऐतिहासिक विरोध में सैंकड़ों कार्यकर्ताओं और सरपंचों ने एकजुट होकर हुंकार भरी।

भीलवाड़ा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर मचे सियासी घमासान ने अब जनआंदोलन का रूप ले लिया है। भीलवाड़ा के ग्रामीण अंचलों में आज कांग्रेस ने केंद्र सरकार की कथित 'जनविरोधी' नीतियों के खिलाफ हुंकार भरते हुए स्पष्ट कर दिया कि गरीबों के निवाले पर किसी भी तरह का प्रहार सहन नहीं किया जाएगा। जिला कांग्रेस कमेटी भीलवाड़ा (देहात) के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रामलाल जाट के नेतृत्व में आयोजित इस सघन जनसंपर्क और विरोध प्रदर्शन ने जिले की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। शनिवार को मांडल-सुवाणा ब्लॉक के विभिन्न गांवों में आयोजित चौपालों और सभाओं में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को कमजोर करने की साजिशों का पर्दाफाश किया।
इस आंदोलन की शुरुआत सुबह 11 बजे रिछड़ा ग्राम पंचायत के छापरी गांव से हुई, जिसके बाद दोपहर 12 बजे बड़ा महुआ, डेढ़ बजे खायडा, 3 बजे सीदडीयास, सवा चार बजे कोदुकोटा और शाम साढे पांच बजे सुवाना में विशाल जनसभाओं का आयोजन किया गया। इन सभाओं को संबोधित करते हुए रामलाल जाट ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा कानून में बदलाव कर इसे धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही है। जाट ने वित्तीय भार को राज्य सरकारों पर डालने के प्रस्ताव और मनरेगा के मूल स्वरूप के साथ हो रही छेड़छाड़ को गरीबों के हक पर सीधा हमला करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि योजना में 'जीरामजी' का नाम कहीं भी सम्मानपूर्वक जोड़ा जाता तो कांग्रेस विरोध नहीं करती, लेकिन आम जनता को भ्रमित करने के उद्देश्य से लिया जा रहा सहारा निंदनीय है। कांग्रेस की मुख्य मांग है कि जिस तरह सरकारी कर्मचारियों को महीने के अंत में वेतन मिलता है, उसी प्रकार मनरेगा मजदूरों को भी सप्ताह पूरा होते ही भुगतान सुनिश्चित किया जाए और देरी होने पर ब्याज दिया जाए।
इस विरोध प्रदर्शन में सांगठनिक एकजुटता की एक बड़ी तस्वीर भी देखने को मिली। कार्यक्रम में विधानसभा प्रभारी भगवान मुक्कड़, प्रदेश सचिव शंकर लाल गाडरी, विधानसभा समन्वयक डॉ. प्रदीप व्यास और ब्लॉक अध्यक्ष विकास सूवलाका ने भी केंद्र की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए कार्यकर्ताओं में जोश भरा। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने आंदोलन को और मजबूती प्रदान की, जिसमें एससी मोर्चा के जिला अध्यक्ष भेरू लाल बैरवा, कन्हैया लाल गाडरी, रिछड़ा सरपंच भेरू लाल सुवालका, बड़ा महुआ सरपंच बद्री लाल जाट, सीदडीयास सरपंच गोपाल लाल जाट, कोदुकोटा के पूर्व सरपंच हिम्मत सुवालका, सुवाना सरपंच अमित चौधरी, मंडल अध्यक्ष सुशील चपलोत, पूर्व सरपंच जीवराज जाट, पूर्व सरपंच भंवर वैष्णव, सतु शर्मा पीपली, अमित जोशी, भोलू गाडरी, दुर्गा सिंह, शुभम जाट और धनराज जाट सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। गगनभेदी नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि जब तक मनरेगा के अस्तित्व और मजदूरों के अधिकारों पर मंडरा रहे खतरे टल नहीं जाते, यह संघर्ष थमेगा नहीं। यह आंदोलन न केवल भीलवाड़ा बल्कि पूरे राजस्थान में ग्रामीण अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ी लकीर खींचने की ओर अग्रसर है।

