भीलवाड़ा में मनरेगा नाम बदलने पर कांग्रेस का तीखा विरोध, रामलाल जाट ने केंद्र सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया
भीलवाड़ा में जिला कांग्रेस के पूर्व मंत्री रामलाल जाट ने मनरेगा योजना का नाम बदलने को लोकतंत्र और मजदूर वर्ग पर हमला बताया। कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक और नारे के माध्यम से विरोध जताया गया, साथ ही अरावली और माइनिंग के मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की गई।

भीलवाड़ा। जिला कांग्रेस देहात के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री रामलाल जाट ने सोमवार को केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलना केवल प्रतीकात्मक परिवर्तन नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मजदूर वर्ग पर सीधा हमला है। उन्होंने इस बदलाव को पुराने राजशाही और तानाशाही शासन की याद दिलाने वाला बताया।
जिला कांग्रेस कमेटी देहात द्वारा आयोजित जन संवाद और विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में जाट ने कहा कि पहले मनरेगा का एक्शन प्लान ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार होता था, जिससे विकास की प्रक्रिया स्थानीय स्तर तक पहुँचती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार ने इस योजना के निर्माण और क्रियान्वयन के अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं और ऊपर से निर्देशित योजनाएं लागू की जा रही हैं। रामलाल जाट ने आरोप लगाया कि मजदूर वर्ग से ही बाजार और व्यापार चलता है, जिसे केंद्र सरकार की नीतियों ने कमजोर कर दिया है।
कार्यक्रम के दौरान जाट ने अरावली पर्वतमाला और सरिस्का क्षेत्र में माइनिंग के मुद्दे पर भी सरकार को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में बंद हुई माइनिंग को फिर से शुरू करने के प्रयास पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा मानवता की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है और गांधी के विचार, मनरेगा योजना और अरावली पर्वतमाला एक-दूसरे के पूरक हैं।
विरोध प्रदर्शन में कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मनरेगा का नाम बदलने से उत्पन्न होने वाले दुष्परिणामों को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के दौरान “काला कानून वापस लो”, “नरेगा बहाल करो” और “मनरेगा नहीं तो वोट नहीं” जैसे नारे लगाए गए।
कार्यक्रम में पूर्व जिला अध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी, कैलाश व्यास, अनिल डांगी, मधु जाजू, हेमेंद शर्मा, राजेंद्र त्रिवेदी, ओमप्रकाश नाराणीवाल, हगामीलाल मेवाड़ा और ज्ञानमेल खटीक मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन महेश सोनी ने किया।
इस कार्यक्रम ने मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन और स्थानीय विकास पर इसके प्रभाव को लेकर व्यापक जनचेतना पैदा की है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है।
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