भीलवाड़ा। केंद्र सरकार की नीतियों और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के भविष्य को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच आज वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में कांग्रेस ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। 24 जनवरी 2026 की सुबह भीलवाड़ा के आक के काँलानी कम्युनिटी हॉल के समीप एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जिला कांग्रेस कमेटी (शहर) के अंतर्गत महेश मंडल द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय धरना-अनशन ने न केवल मजदूरों की आवाज को बुलंद किया, बल्कि केंद्र सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान भी खड़े कर दिए हैं।

सुबह 10 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक चले इस सघन विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के दिग्गजों ने एकजुट होकर हुंकार भरी। विरोध का मुख्य केंद्र केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून में प्रस्तावित वे बदलाव हैं, जिन्हें कांग्रेस 'गरीब विरोधी साजिश' करार दे रही है। महेश मंडल अध्यक्ष सत्य नारायण तोतला ने तीखे शब्दों में प्रहार करते हुए कहा कि राज्य सरकारों पर 40 प्रतिशत वित्तीय भार डालने और योजना का नाम बदलने जैसे प्रयास सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने वाले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा में किसी भी प्रकार का संशोधन या इसे कमजोर करने की कोशिशों को कांग्रेस कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशों के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व महेश मंडल प्रभारी गुड़वीन नसाह और सह-प्रभारी राज कुमार पायक ने किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित जिला कांग्रेस कमेटी (शहर) के जिलाध्यक्ष शिवराम जीपी खटीक ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि मनरेगा महज एक योजना नहीं, बल्कि देश के करोड़ों गरीबों का 'जीवन सुरक्षा कवच' है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने जनविरोधी नीतियां वापस नहीं लीं, तो यह आंदोलन सड़क से लेकर संसद तक और भी उग्र रूप धारण करेगा।

निसार सिलावट के कुशल मंच संचालन में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में शहर के तमाम प्रभावशाली कांग्रेसी चेहरे एक मंच पर नजर आए। इस दौरान नगर निगम नेता प्रतिपक्ष धर्मेंद्र पारीक, राजेंद्र जैन, अनिल राठी, अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष हमीद रंगरेज, मोहम्मद हारून रंगरेज और पार्षद प्रकाश चंद्र ओझा ने अपनी उपस्थिति से आंदोलन को मजबूती प्रदान की। साथ ही डॉ. फरियाद मोहम्मद, लाजपथ आचार्य, शिवराज सुराणा, गोपाल शिबू खान, दिनेश बैरवा, कुनाल गोरण, लक्ष्मी नारायण मेवाड़ा, मीठ सिंह चौहान, संजय यादव, उमेश कुमार टेलर, रतन लाल धोबी, दीपक व्यास, करण सिंह, सुभाष चंद्र आर्य, मुकेश जयसवाल, रोहित राठोड़ और रवि पायक सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

जैसे-जैसे सूरज चढ़ा, कार्यकर्ताओं का संकल्प और भी गहरा होता गया। धरने के अंत में उपस्थित सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से मनरेगा के अस्तित्व को बचाने और गरीबों के हक की रक्षा करने की शपथ ली। भीलवाड़ा का यह प्रदर्शन इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में रोजगार और ग्रामीण विकास के मुद्दों पर राजनीति और भी गरमाने वाली है। यह धरना केवल एक दिवसीय सांकेतिक अनशन नहीं था, बल्कि भविष्य के एक बड़े जन-आंदोलन की आधारशिला के रूप में देखा जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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