भीलवाड़ा में मनरेगा बचाने को लेकर कांग्रेस का शंखनाद: जिलाध्यक्ष रामलाल जाट के नेतृत्व में उपवास रख केंद्र सरकार के संशोधनों को बताया मजदूर विरोधी
भीलवाड़ा में मनरेगा बचाओ संग्राम जनआंदोलन के तहत जिलाध्यक्ष रामलाल जाट के नेतृत्व में कांग्रेस ने एक दिवसीय उपवास कर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। मनरेगा एक्ट में बदलाव को किसान-मजदूर विरोधी बताते हुए कांग्रेस ने 6 फरवरी तक चलने वाले चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। जानिए भीलवाड़ा रेल्वे स्टेशन पर हुए इस विरोध प्रदर्शन और एक्ट में हुए बड़े बदलावों के बारे में पूरी जानकारी।

भीलवाड़ा। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के मूल स्वरूप में किए गए बदलावों के खिलाफ राजस्थान के भीलवाड़ा में आक्रोश की ज्वाला फूट पड़ी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर 'मनरेगा बचाओ संग्राम जनआंदोलन' के तहत सोमवार, 12 जनवरी 2026 को जिला कांग्रेस कमेटी भीलवाड़ा (देहात) ने एक निर्णायक मोर्चा खोल दिया। शहर के हृदय स्थल डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सर्किल पर जिलाध्यक्ष रामलाल जाट के नेतृत्व में आयोजित एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम में कांग्रेसियों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर और किसान की 'आत्मा पर प्रहार' करार दिया। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चले इस सत्याग्रह ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा की, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष रामलाल जाट ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की जीवनरेखा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि अधिनियम में किए गए बदलावों से देश में बेरोजगारी का भयावह दौर लौटेगा और गांवों से शहरों की ओर पलायन तेज होगा। जाट ने कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पहले मजदूरों को काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार की गारंटी थी और विफल रहने पर बेरोजगारी भत्ता मिलता था, लेकिन नए बदलावों ने इस अधिकार को ही छीन लिया है। अब मजदूर काम मांग नहीं सकेगा, बल्कि उसे सरकार की मर्जी पर निर्भर रहना होगा। उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार पिछले दो वर्षों से मेट और मजदूरों का भुगतान नहीं कर पाई है, तो राज्य सरकार 40 प्रतिशत भुगतान का भार कैसे वहन करेगी, जबकि वर्तमान में कर्मचारियों के वेतन तक के लाले पड़े हैं।
आंदोलन की विस्तृत कार्ययोजना साझा करते हुए बताया गया कि यह संग्राम केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगा। 12 जनवरी से 29 जनवरी तक कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव, ढाणी-ढाणी जाकर आमजन को जागरूक करेंगे। इसके पश्चात 30 जनवरी को जिले के सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण धरने दिए जाएंगे, जबकि 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला मुख्यालय पर अनवरत धरना और प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार को अधिनियम वापस लेने हेतु ज्ञापन सौंपा जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत में स्वामी विवेकानंद की जयंती और पूर्व जिलाध्यक्ष हाफिज मोहम्मद की पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया गया।
इस विशाल उपवास कार्यक्रम में जिले के दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही। सत्याग्रह में अक्षय त्रिपाठी, कैलाश व्यास, हगामी लाल मेवाड़ा, राजेन्द्र त्रिवेदी, ओम नारानीवाल, दुर्गेश शर्मा, शिव कुमार कौशिक, रणदीप त्रिवेदी, वंदना माथुर, विभा माथुर, गोवर्धन गुर्जर, शंकर लाल गाडरी, सुशीला सालवी, चेतन डीडवानिया, महेश सोनी, ईश्वर खोईवाल, शंकर लाल कुमावत, जितेंद्र मूंदड़ा, संदीप जीनगर, आशीष राजस्थला, श्याम लाल गुर्जर, भंवर गर्ग, अनिल राठी, गोपाल तिवाड़ी, हेमेन्द्र शर्मा, विकास सुवालका, ओम तेली, राजू डिडवानिया, दुर्गा बैरवा, डॉ आर सी सामरिया, शंभु गुर्जर, अर्चना दुबे, अविनाश शर्मा, सुरेश बंब, भेरू लाल बैरवा, अमरवाल, और हरफूल जाट सहित पीसीसी सदस्य, पूर्व विधायक, विधायक प्रत्याशी, पंचायती राज के प्रतिनिधि और अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। भीलवाड़ा की सड़कों पर गूंजता यह विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में मनरेगा के अधिकारों की रक्षा के लिए यह जनआंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।

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