चित्तौड़गढ़ के रामद्वारा में चल रही चातुर्मासिक शिव पुराण कथा में संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि सद्गुरु की ओर से दिया गया मंत्र सर्वश्रेष्ठ माना गया है और सद्गुरु के बिना भगवान शिव की कृपा भी प्राप्त नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भगवान शिव और पार्वती को माता-पिता मानकर शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने वालों पर भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

कथा वाचन के दौरान संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि कार्तिक मास का देव पूजन में विशेष महत्व है। जिसकी भगवान से प्रीत नहीं होती, उन्हें प्रेत बनना पड़ता है। भगवान से प्रेम रखने वालों के ग्रह शांत होते हैं। कृतिका नक्षत्र में सोमवार को किया गया पूजन सभी तरह से श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों में मळ मास का भी विशेष महत्व माना गया है। इसमें पूजन के साथ महाप्रसाद चढ़ाने का विधान है।

संत ने कहा कि अधिकांश श्रद्धालुओं को पंच गव्य और पंच द्रव्य के बीच का अंतर पता नहीं होता। पंच गव्य में दूध, दही, गाय के घी, गोमूत्र व गोबर का मिश्रण किया जाता है, जबकि पंच द्रव्य में दूध, दही, शक्कर, शहद और घी का मिश्रण किया जाता है।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति नियमित रूप से भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र का उच्चारण करता है, वह सभी तरह की सिद्धियां प्राप्त करने का अधिकारी हो जाता है। भक्ति का भेद सद्गुरु की कृपा से ही प्राप्त हो सकता है। शिव पुराण जीवन में विषमताएं होने के बाद भी प्रसन्न रहने की सीख देती है। जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी ही बदल जाएं, लेकिन मन की स्थिति स्थिर रहनी चाहिए।

संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि जिस तरह आंखें दो हैं, लेकिन दृष्टि एक ही है, उसी तरह गुरु और गोविन्द भी एक ही हैं। कथा श्रवण के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामद्वारा पहुंच रहे हैं।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story