भीलवाड़ा सहित पूरे राजस्थान में थमेंगे बसों के पहिये: परिवहन विभाग की ‘दमनकारी’ नीतियों के खिलाफ कल महासंग्राम
राजस्थान में परिवहन विभाग की कथित दमनकारी नीतियों के खिलाफ बस ऑपरेटरों ने कल, 24 जनवरी 2026 को प्रदेशव्यापी चक्का जाम का ऐलान किया है। भीलवाड़ा सहित पूरे प्रदेश में निजी, स्कूल और सिटी बसों का संचालन बंद रहेगा। सत्यनारायण साहू और जगदीश चन्द्र ओझा (गुड्डू) के नेतृत्व में हो रहे इस विरोध प्रदर्शन से जुड़ी पूरी रिपोर्ट और मांगों का विवरण यहाँ पढ़ें।

भीलवाड़ा। राजस्थान के परिवहन विभाग और निजी बस ऑपरेटरों के बीच छिड़ी जंग अब निर्णायक मोड़ पर आ गई है। प्रदेश के परिवहन विभाग की तथाकथित ‘दमनकारी’ नीतियों और भेदभावपूर्ण रवैये के विरोध में कल, 24 जनवरी 2026 को पूरे प्रदेश में चक्का जाम रहेगा। बस ऑपरेटरों ने सरकार की कार्यप्रणाली को मोटर व्हीकल एक्ट के विरुद्ध बताते हुए आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। यह हड़ताल न केवल परिवहन व्यवस्था को चरमराएगी, बल्कि सरकार के राजस्व और आम जनजीवन पर भी गहरा असर डालने वाली है।
बस ऑपरेटर एसोसिएशन राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष श्री सत्यनारायण साहू के आह्वान पर आयोजित इस प्रदेशव्यापी बंद के दौरान निजी बसों के पहिये पूरी तरह थमे रहेंगे। एसोसिएशन के प्रदेश प्रवक्ता जगदीश चन्द्र ओझा (गुड्डू) ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि परिवहन आयुक्त द्वारा निजी बस ऑपरेटरों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग के अधिकारी मोटर व्हीकल एक्ट की धज्जियां उड़ाते हुए उन नियमों के तहत चालान काट रहे हैं, जिनका कानून में कोई अस्तित्व ही नहीं है। आरोप है कि आरटीओ, डीटीओ और निरीक्षकों को अवैध वसूली के टारगेट दिए जा रहे हैं और लक्ष्य पूरा न होने पर उनकी आईडी तक बंद की जा रही है, जिससे पूरा प्रशासनिक ढांचा दबाव में है।
इस विवाद का सबसे मानवीय पहलू यात्रियों से जुड़ा है। बस संचालकों का कहना है कि प्रवर्तन अधिकारी बीच रास्ते में बसें रोककर यात्रियों को उतार रहे हैं, जो न केवल अमानवीय है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है। इसके अलावा, स्टेज कैरिज बसों में जंगला और सीढ़ी को लेकर चल रहा विवाद भी इस आंदोलन की मुख्य जड़ है। ऑपरेटरों का दावा है कि कानूनन प्रावधान होने के बावजूद अधिकारी जबरन इन्हें उतरवा रहे हैं और मना करने पर वाहनों को सीज किया जा रहा है।
कल होने वाली इस एक दिवसीय हड़ताल का दायरा काफी व्यापक है। इसमें राजस्थान की लोक परिवहन सेवा, स्टेज कैरिज, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज, उपनगरीय बसें, ग्रामीण एवं सिटी बसें, तथा स्कूल और फैक्ट्री की बसें भी शामिल रहेंगी। एसोसिएशन ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार और परिवहन विभाग ने अपना अड़ियल रुख नहीं बदला और संवाद का रास्ता नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। फिलहाल, कल होने वाली भारी असुविधा को देखते हुए ऑपरेटरों ने जनता से सहयोग की अपील की है, लेकिन सवाल यह बना हुआ है कि क्या सरकार इस गतिरोध को खत्म करने के लिए कोई कदम उठाएगी या प्रदेश कल एक बड़े परिवहन संकट से जूझता नजर आएगा।

Pratahkal Bureau
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