भीलवाड़ा। पिछले कई दिनों से भीलवाड़ा में मौसम लगातार कड़ा होता जा रहा है। दिन-ब-दिन तापमान में गिरावट और सुबह-शाम ठंडी हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। इतनी तीव्र सर्दी के बीच शहर में एक अनोखा नजारा देखने को मिला है, जहां सिर्फ लोग ही नहीं, बल्कि मंदिरों में विराजमान भगवान को भी ठंड से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

शहर के सांगानेरी गेट स्थित दूधाधारी मंदिर में राधा-कृष्ण को रात के समय गरम रजाई और ब्लैंकेट ओढ़ाई जा रही है, ताकि उन्हें ठंड से सुरक्षा मिल सके। इसी तरह, वीर सावरकर चौक स्थित वीर हनुमान मंदिर में भी सर्दी को देखते हुए राम दरबार को ब्लैंकेट और दोवड़ ओढ़ाई जा रही है। हनुमान जी और भोले बाबा को भी विशेष रूप से गरम रजाई पहनाई जा रही है। मंदिर परिसर में यह दृश्य श्रद्धालुओं की भक्ति और लगाव को दर्शाता है।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि पौष माह में सर्दी अपने चरम पर होती है। जैसे भक्त स्वयं ठंड से बचाव करते हैं, उसी भावना के तहत भगवान के शयन की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा श्रद्धा और भक्ति की गहराई को दर्शाती है।

ठंड के बीच भी मंदिरों में भक्ति का माहौल पूरी तरह जीवंत बना हुआ है। भक्त सुबह मंगला आरती से लेकर रात की शयन आरती तक भजनों और कीर्तन के माध्यम से भगवान की सेवा कर रहे हैं। मंदिरों की यह सतर्कता और भक्तों की निष्ठा ठंड के प्रकोप के बावजूद भक्ति की आंच को जीवंत बनाए हुए है।

मंदिरों के अलावा घरों में भी ठाकुर जी के खान-पान में बदलाव किया गया है। लड्डू गोपाल को अब ठंडे भोग की बजाय हलवा, खिचड़ी, दाल-बाटी, ढोकले जैसे गरम व्यंजन अर्पित किए जा रहे हैं। इससे न केवल श्रद्धालुओं की आस्था प्रकट होती है, बल्कि ठंड के मौसम में भगवान की सुरक्षा और सेवा की परंपरा भी जीवित रहती है।

भीलवाड़ा में यह दृश्य यह साबित करता है कि चाहे मौसम कितना भी सख्त क्यों न हो, श्रद्धा और भक्ति की आंच हमेशा गर्म रहती है।

Pratahkal Bureau

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