भीलवाड़ा। शहर के पुर रोड स्थित बापूनगर क्षेत्र की बंजारा बस्ती एक बार फिर गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से यहां निवास कर रहे करीब 44 गरीब, मजदूर और मेहनतकश परिवारों के सामने अपने आशियाने खोने का खतरा मंडरा रहा है। बस्तीवासियों ने नगर विकास न्यास भीलवाड़ा पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर से हस्तक्षेप और न्याय की गुहार लगाई है।

बस्ती के लोगों का आरोप है कि नगर विकास न्यास भीलवाड़ा द्वारा कियोस्क निर्माण की आड़ में उनके मकानों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है। अचानक शुरू हुई इस प्रक्रिया से पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। वर्षों से बसे परिवारों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें उजाड़ने की कोशिश की जा रही है, जो मानवीय और कानूनी दोनों दृष्टियों से अन्यायपूर्ण है।

बस्तीवासियों ने वर्ष 2002 की उस घटना को भी याद दिलाया, जब तत्कालीन नगर विकास न्यास चेयरमेन लक्ष्मीनारायण डाड के कार्यकाल में बस्ती के 44 कच्चे मकानों को यह आश्वासन देकर तोड़ दिया गया था कि उनके स्थान पर पक्के मकान बनाकर मात्र एक रुपये में पट्टे दिए जाएंगे। लेकिन यह वादा आज तक अधूरा है। 44 मकानों के बदले केवल 29 मकान ही बनाए गए, जबकि 15 परिवारों को खाली जमीन पर छोड़ दिया गया। कुछ परिवारों को पट्टे मिले, लेकिन अधिकांश आज भी वैधानिक अधिकारों से वंचित हैं। मजबूरी में इन परिवारों ने अपने सीमित संसाधनों से कच्चे-पक्के मकान बनाकर जीवन आगे बढ़ाया।

बस्तीवासियों का कहना है कि उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, पहचान पत्र, मजदूर डायरी और वर्षों से जमा किए गए बिजली बिल जैसे सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं, जो उनके लंबे समय से यहां निवास का प्रमाण हैं। इसके बावजूद नगर विकास न्यास भीलवाड़ा द्वारा उन्हें अवैध कब्जाधारी बताकर डराया-धमकाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर विकास न्यास के अधिकारी और कर्मचारी जबरन मकान खाली कराने का दबाव बना रहे हैं और तोड़फोड़ की तैयारी कर रहे हैं। इस स्थिति ने बस्ती में रहने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया है। भय के साए में जी रहे इन परिवारों को आशंका है कि किसी भी दिन उनका आशियाना छिन सकता है।

इस पूरे मामले को लेकर बंजारा बस्ती के निवासियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि बस्ती के किसी भी मकान को नहीं तोड़ा जाए, वर्ष 2002 में दिए गए आश्वासन के आधार पर सभी 44 परिवारों को पट्टे जारी किए जाएं और गरीब व मजदूर परिवारों के साथ हो रहे अन्याय को तुरंत रोका जाए। यह मामला अब केवल एक बस्ती का नहीं, बल्कि शहर में गरीबों के आवास और उनके अधिकारों से जुड़ा गंभीर सामाजिक प्रश्न बनता जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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