भीलवाड़ा। मजदूरी के लिए महाराष्ट्र गये बराणा की झोंपडिय़ा गांव के एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से खफा आदिवासी भील समाज आज शव के साथ आसींद थाने पहुंच गया।


घटना का विवरण और आक्रोशित प्रदर्शन आक्रोशित लोगों ने थाने का घेराव कर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। ये लोग मृतक आश्रितों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, सरकारी नौकरी और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़ गये। पुलिस ने लोगों को समझाइश कर शांत करवा दिया।

मौत की संदिग्ध परिस्थितियां और परिजनों के आरोप

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि बराणा की झोंपडिय़ा गांव का रमेश (35) पुत्र भंवरलाल भील एक ठेकेदार के अधीन मजदूरी करने महाराष्ट्र के नासिक गया था।

रमेश की एक फरवरी को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शव रेलवे ट्रैक पर मिला। आरोप है कि "रेलवे पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को वहीं दफना दिया। इसकी सूचना भी परिजनों को नहीं दी गई।"

शव की बरामदगी और आसींद आगमन

इसका पता चलने पर परिजन वहां गये और प्रशासन से स्वीकृति लेने के बाद दफनाये गये रमेश के शव को बाहर निकलवाया, जिसे आज आसींद लाया गया।


थाने का घेराव और प्रमुख मांगें

सुबह करीब आठ बजे बड़ी संख्या में लोग शव लेकर आसींद थाने के बाहर जुट गये। ये लोग थाने का घेराव कर नारेबाजी करने लगे। इन लोगों ने पुलिस के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

मृतक रमेश के आश्रितों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना। सरकारी नौकरी देना। शव का दुबारा पोस्टमार्टम कराना। ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज करना।

पुलिस प्रशासन की कार्रवाई

डीएसपी ओमप्रकाश सिंह सौलंकी व आसींद थाना प्रभारी ने समझाइश कर लोगों को आश्वस्त किया कि "जो भी उचित कार्रवाई होगी, वो की जायेगी।" उधर, प्रदर्शन को देखते हुये आसींद पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये हैं।

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