भीलवाड़ा/पाली। आस्था और उम्मीद जब लाचारी के समक्ष घुटने टेक देती है, तो मंजर हृदयविदारक हो जाता है। राजस्थान के पाली जिले से एक ऐसी ही मर्मस्पर्शी घटना सामने आई है, जहाँ जीवन की सलामती की दुआ मांगने आई एक महिला की मौत माता के मंदिर की चौखट पर ही हो गई। नियति का क्रूर प्रहार कुछ ऐसा रहा कि जिस दहलीज पर भक्त ने जीवन की भीख मांगी, वही उसकी अंतिम यात्रा का साक्षी बनी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पाली जिले की निवासी 25 वर्षीय जमना भील पिछले लंबे समय से टीबी (TB) जैसी प्राणघातक बीमारी से संघर्ष कर रही थी। निरंतर बीमारी के कारण उसका शरीर अत्यंत दुर्बल और पस्त हो चुका था, किंतु परिवार के मन में श्रद्धा की एक लौ शेष थी। इसी अटूट विश्वास के सहारे परिजन उसे आध्यात्मिक उपचार और दुआ की आस में सुप्रसिद्ध बांक्यारानी माता जी के मंदिर लेकर पहुंचे थे।

घटना के समय मानवीय विवशता का चरम रूप देखने को मिला। शंभूगढ़ थाना पुलिस के मुताबिक, रविवार को जब जमना का पति और पिता समीप ही स्थित एक अन्य मंदिर में दर्शन हेतु गए थे, तब जमना बांक्यारानी माता मंदिर के मुख्य द्वार पर विश्राम कर रही थी। विडंबना देखिए कि अपनों के लौटने और दुआओं के पूर्ण होने से पूर्व ही जमना की सांसों की डोर टूट गई। जब परिजन लौटकर आए, तो वहां प्रार्थना के स्वर मातम में बदल चुके थे।

मामले की सूचना मिलते ही पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंचा और घटनाक्रम का जायजा लिया। पुलिस जांच में पुष्टि हुई कि मृतका लंबे समय से गंभीर रुग्णता से ग्रसित थी। परिजनों ने किसी भी प्रकार की पुलिसिया कार्रवाई अथवा शव का पोस्टमार्टम कराने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके पश्चात, परिजनों द्वारा दी गई लिखित सहमति के आधार पर पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण कर बिना पोस्टमार्टम के शव उन्हें सुपुर्द कर दिया।

भक्ति के अटूट विश्वास और बीमारी के घातक प्रहार के बीच घटी यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर जीवन को बचाने की अंतिम आस थी, तो दूसरी ओर नियति का वह अटल सत्य, जिसने मंदिर की चौखट पर ही एक जीवन का अंत कर दिया।

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