भीलवाड़ा: संतों के संकल्प से संवरेगी माता शबरी की पावन तपोस्थली, सेवा और संवेदना की बही बयार
भीलवाड़ा के गुरलां में माता शबरी की तपोस्थली को भव्य रूप देने के लिए महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने 2 लाख रुपये की सहायता दी। टेकरी के हनुमान मंदिर के पास कुटिया निर्माण और पौधारोपण के साथ-साथ जरूरतमंदों को शॉल वितरण कर संतों ने सेवा और संवेदना का अनूठा संदेश दिया। जानिए इस धार्मिक और सामाजिक पहल की पूरी रिपोर्ट।

भीलवाड़ा। आस्था, अध्यात्म और सामाजिक समरसता की त्रिवेणी जब एक साथ प्रवाहित होती है, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नींव पड़ती है। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गुरलां स्थित टेकरी के हनुमान मंदिर परिसर में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहाँ युगों-युगों से भक्ति की प्रतिमूर्ति मानी जाने वाली माता शबरी की तपोस्थली को नया स्वरूप देने का पुनीत कार्य प्रारंभ हुआ है। संतों के आशीर्वाद और समाज के सहयोग से इस पावन धरा पर न केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा खड़ा हो रहा है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सेवा का एक भव्य महल भी निर्मित हो रहा है।
इस पुनीत कार्य को गति देने के लिए हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने अपनी उदारता का परिचय देते हुए 2 लाख रुपये की सहयोग राशि समर्पित की है। यह राशि हंसगंगा हरि शेवा चेरिटेबल ट्रस्ट एवं हरि शेवा धाम चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से दो अलग-अलग चेकों के माध्यम से माता शबरी कुटिया छाया निर्माण समिति के प्रमुख महंत पुनीत दास त्यागी को सौंपी गई। इस दौरान स्वामी हंसराम उदासीन ने जोर देते हुए कहा कि माता शबरी की तपोस्थली का विकास केवल एक भौतिक निर्माण नहीं है, अपितु यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का एक माध्यम है।
प्रस्तावित निर्माण योजना के अनुसार, यहाँ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। छायादार क्षेत्र के चारों ओर सुरक्षित तारबंदी कर सघन पौधारोपण किया जाएगा, ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को प्रकृति की गोद में शांति की अनुभूति हो सके। साथ ही, दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं की सुविधा के लिए बैठने हेतु कुर्सियों की व्यवस्था की जाएगी। श्री बालाजी समाज सेवा समिति के पदाधिकारियों ने संतों के इस सहयोग को ऐतिहासिक बताते हुए विश्वास जताया कि यह स्थान भविष्य में पर्यटकों और साधकों के लिए श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बनेगा।
धर्म और सेवा का यह संगम केवल मंदिर निर्माण तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के मंत्र को चरितार्थ करते हुए अम्बेडकर कॉलोनी और कांवाखेड़ा बस्ती में सेवा का एक और अध्याय लिखा गया। कड़ाके की ठंड को देखते हुए यहाँ के जरूरतमंद और वंचित परिवारों को शॉल वितरित किए गए। संतों ने अपने हाथों से गर्म वस्त्र भेंट कर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। इस पूरे आयोजन में संत मायाराम, संत गोविंद राम, ब्रह्मचारी इंद्रदेव, कुनाल सिद्धार्थ, मिहिर, श्री बालाजी समाज सेवा समिति के अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह पुरावत, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश भुनकर, सचिव योगेंद्र सिंह पंवार, छितर मल गेंगट, महावीर गेंगट और इंद्र अवतानी सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। संतों का यह साझा संकल्प और समाज की सहभागिता भीलवाड़ा की इस पावन धरा पर भक्ति और सेवा की नई इबारत लिख रही है।

Pratahkal Bureau
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