भीलवाड़ा: पीले फूलों की महक और भजनों की गूंज, उड़ान क्लब ने मां शारदे के चरणों में अर्पित की बसंत की पहली दस्तक
भीलवाड़ा के उड़ान क्लब ने संरक्षक प्रतिभा मानसिंहका की अध्यक्षता में बसंत पंचमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया। पीले फूलों से मां सरस्वती का भव्य श्रृंगार, भक्तिपूर्ण भजनों की प्रस्तुति और आगामी सेवा कार्यों की योजना के साथ यह उत्सव संपन्न हुआ। इस रिपोर्ट में जानें कैसे भीलवाड़ा की महिलाओं ने सांस्कृतिक और सामाजिक सरोकारों का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

भीलवाड़ा। प्रकृति की गोद में बसंत की आहट और पीले परिधानों में सजी महिलाओं का उत्साह—कुछ ऐसा ही अलौकिक दृश्य भीलवाड़ा के एक निजी रिसोर्ट में जीवंत हो उठा, जहाँ उड़ान क्लब ने बसंत पंचमी का पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया। क्लब की संरक्षक प्रतिभा मानसिंहका की गरिमामयी अध्यक्षता में आयोजित इस उत्सव ने न केवल कला और संस्कृति का सम्मान किया, बल्कि नारी शक्ति के सामूहिकता और सेवा के संकल्प को भी एक नई दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम का श्रीगणेश परंपरा और आत्मीयता के संगम के साथ हुआ, जहाँ अंजना मानसिंहका ने तिलक लगाकर सभी आगंतुक सदस्यों का स्वागत किया। बसंत की जीवंतता को चरितार्थ करते हुए नीलू वागरानी और आशा अग्रवाल ने मां सरस्वती की प्रतिमा का पीले फूलों से मनमोहक श्रृंगार किया और परिसर में एक आकर्षक रंगोली उकेरी, जिसने वहां मौजूद हर शख्स को मंत्रमुग्ध कर दिया। ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां शारदे की सामूहिक स्तुति और अर्चना के बाद, भक्तिपूर्ण भजनों और गीतों की मधुर लहरियों ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक और उत्सवमयी बना दिया।
उत्सव के औपचारिक पक्ष की ओर बढ़ते हुए, संरक्षक प्रतिभा मानसिंहका के कुशल निर्देशन में क्लब की मासिक बैठक संपन्न हुई। इस दौरान आगामी सत्र के लिए सेवा कार्यों और सामाजिक उत्तरदायित्वों की एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की गई, जो समाज के प्रति क्लब की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मनोरंजन और प्रतिस्पर्धा के दौर में सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें आयोजित खेलों में अपनी बुद्धिमत्ता और गति का परिचय देते हुए सपनी अग्रवाल, द्रोपदी मानसिंहका और आभा मित्तल ने विजय पताका फहराई।
इस गरिमामयी आयोजन में मधु लोढ़ा, उषा मानसिंहका, गुणमाला अग्रवाल और दीपिका रहेजा सहित क्लब की अनेक गणमान्य सदस्याओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को पूर्णता प्रदान की। यह आयोजन केवल एक ऋतु पर्व नहीं था, बल्कि भीलवाड़ा की महिलाओं के लिए अपनी परंपराओं को सहेजने और सामाजिक सरोकारों से जुड़ने का एक सशक्त मंच साबित हुआ। भक्ति, संस्कृति और सेवा का यह अनूठा संगम अंततः प्रसाद वितरण और भविष्य के नेक संकल्पों के साथ संपन्न हुआ।

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