भीलवाड़ा के रणबांकुरों ने गुजरात में गाड़ा जीत का झंडा, ऐतिहासिक खिताबी जीत के बाद शहर में निकला विजय जुलूस
भीलवाड़ा खटीक समाज क्रिकेट टीम ने सूरत में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। कप्तान मनोज खोईवाल के नेतृत्व में चैंपियन बनकर लौटी टीम का भीलवाड़ा में ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ भव्य स्वागत किया गया। लैंडमार्क होटल से दादाबाड़ी तक निकले विशाल विजय जुलूस में उमड़ा जनसैलाब। पढ़ें पूरी खबर।

भीलवाड़ा। खेल के मैदान पर जब जुनून और जज्बा मिलता है, तो इतिहास रचा जाता है। कुछ ऐसा ही कीर्तिमान भीलवाड़ा की खटीक समाज क्रिकेट टीम ने गुजरात की धरती पर स्थापित किया है। सूरत में आयोजित दीनबंधु सेवा ट्रस्ट के राष्ट्रीय स्तरीय खटीक समाज क्रिकेट टूर्नामेंट में भीलवाड़ा की टीम ने अपने अदम्य साहस और कौशल का परिचय देते हुए खिताबी जीत हासिल की। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद जब विजेता टीम भीलवाड़ा पहुंची, तो पूरा शहर 'विजयी भव' के नारों से गूंज उठा और खिलाड़ियों का किसी नायक की भांति भव्य स्वागत किया गया।
इस गौरवशाली जीत की पटकथा कप्तान मनोज खोईवाल के कुशल नेतृत्व में लिखी गई। टूर्नामेंट के दौरान टीम ने खेल के हर क्षेत्र में विपक्षी टीमों को पछाड़ते हुए न केवल ट्रॉफी पर कब्जा जमाया, बल्कि भीलवाड़ा के खेल कौशल का लोहा भी मनवाया। जीत का यह उल्लास उस समय चरम पर पहुंच गया जब टीम शहर की सीमा में दाखिल हुई। समर्थकों और समाज के लोगों ने लैंडमार्क होटल से एक भव्य विजय जुलूस की शुरुआत की। यह जुलूस सांगानेरी गेट जैसे मुख्य मार्गों से होता हुआ दादाबाड़ी स्थित कप्तान मनोज खोईवाल के निवास स्थान तक पहुंचा।
पूरे रास्ते में जीत की खुशी का आलम यह था कि जगह-जगह प्रशंसकों ने फूलों की बारिश कर और मालाएं पहनाकर अपने लाडले खिलाड़ियों का अभिनंदन किया। सांगानेरी गेट पर उमड़े जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि यह जीत केवल एक टीम की नहीं, बल्कि पूरे समाज और शहर के सम्मान की जीत है। जुलूस जैसे ही दादाबाड़ी पहुंचा, वहां आतिशबाजी के धमाकों और ढोल-नगाड़ों की थाप ने उत्सव के माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया। डीजे की धुन पर थिरकते युवाओं और बुजुर्गों के चेहरों पर अपनी टीम की सफलता का गर्व साफ झलक रहा था।
इस सम्मान समारोह के दौरान समाज के सम्मानित बुजुर्गों, उत्साहित युवाओं और भारी संख्या में समर्थकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वक्ताओं ने टीम की इस उपलब्धि को समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत बताया, जो भविष्य में युवाओं को खेल के प्रति और अधिक समर्पित होने के लिए प्रोत्साहित करेगी। कप्तान मनोज खोईवाल और उनकी पूरी टीम को मिली यह भव्य विदाई और स्वागत भीलवाड़ा के खेल इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।

Pratahkal Bureau
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