भीलवाड़ा शहर में पहली बार पुरूषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्री हरि एवं माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के उद्देश्य से सप्त दिवसीय श्री विष्णु लक्ष्मी महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन छोटी हरणी स्थित हनुमान टेकरी आश्रम में महन्त बनवारीशरण काठियाबाबा के सान्निध्य में सोमवार सुबह भव्य कलश शोभायात्रा और मंडप प्रवेश के साथ प्रारंभ हुआ।

राष्ट्र कल्याण एवं सर्व मंगल की कामना के साथ आयोजित इस 11 कुण्डीय महायज्ञ में लक्ष्मी स्वरूपा कन्याओं के साथ यजमानों द्वारा आहुतियां दी जा रही हैं। शुभारंभ अवसर पर छोटी हरणी स्थित श्री चारभुजानाथ मंदिर से यज्ञ मंडप तक बैण्ड की मधुर स्वरलहरियों के बीच भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में महन्त बनवारीशरण काठियाबाबा के साथ संतों का सान्निध्य रहा, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर मंगलकलश लेकर शामिल हुईं।

कलश यात्रा में छोटी हरणी के ग्रामीणों के साथ भीलवाड़ा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा के अंत में एक बग्गी में वृन्दावन से लाई गई ठाकुरजी की छवि विराजमान रही। शोभायात्रा के दौरान नवदुर्गा अखाड़ा से जुड़ी लगभग 150 बालिकाओं ने शारीरिक बल एवं कौशल का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की जानकारी संजय शर्मा एवं गुंजन दाधीच ने दी।

यज्ञ मंडप पहुंचने पर महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ यज्ञाचार्य श्री शारदा सनातन परमार्थ न्यास के वेदाचार्य पंडित मुकेश शास्त्री के निर्देशन में हुआ। सर्वप्रथम गणपति मंडल के देवताओं का पूजन, वास्तु मंडल का आह्वान-स्थापना-पूजन एवं अरणी मंथन से अग्नि का प्रादुर्भाव किया गया। इसके पश्चात नवग्रह मंडल, प्रधान गौरी सर्वतोभद्र मंडल एवं विष्णु-लक्ष्मी देवताओं का आह्वान, स्थापना एवं पूजन सम्पन्न हुआ। देवताओं के हवन, अर्चन, आरती एवं परिक्रमा के बाद प्रसाद वितरण के साथ प्रथम दिवस का समापन हुआ।

महन्त बनवारीशरण काठियाबाबा के अनुसार इस महायज्ञ में 111 कलशों को लक्ष्मी स्रोत से सिद्ध किया जाएगा और पूर्णाहुति के बाद यजमानों को लक्ष्मी कलश प्रदान किए जाएंगे। विशेष औषधियों एवं द्रव्यों से यज्ञ के माध्यम से दसविद् लक्ष्मी प्राप्ति, ऋण मुक्ति, रोग नाश एवं राष्ट्र कल्याण की कामना की जा रही है।

द्वितीय दिवस मंगलवार को गुड़, केसर, अनार, हरिद्रा सहित विभिन्न द्रव्यों से हवन किया जाएगा। यह महायज्ञ प्रतिदिन सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित होगा, जिसकी पूर्णाहुति 14 जून को अभिजीत मुहूर्त में संपन्न होगी।

महायज्ञ के साथ ही सोमवार रात से वृन्दावन धाम मथुरा स्थित श्री राधा रासेश्वरी रासलीला मंडल द्वारा भक्तिपूर्ण रासलीला प्रस्तुति का शुभारंभ भी हुआ, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति रस से सराबोर हो गया।

यह महायज्ञ धार्मिक आस्था, वैदिक परंपरा और सामाजिक एकता का संगम बनकर भीलवाड़ा में आध्यात्मिक चेतना को नई ऊंचाई प्रदान कर रहा है।

Pratahkal Bureau

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