भीलवाड़ा यूआईटी: सचिव और ओएसडी के पद खाली होने से ठप पड़ा विकास, जनता परेशान
भीलवाड़ा नगर विकास न्यास में दो माह से सचिव और ओएसडी के पद खाली होने से विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। मानसून से पहले निर्माण कार्यों के रुकने से करोड़ों के नुकसान की आशंका है। क्या मुख्यमंत्री लेंगे संज्ञान?

भीलवाड़ा नगर विकास न्यास (यूआईटी) में प्रशासनिक रिक्तता के कारण शहर के विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया है। पिछले दो महीनों से सचिव और ओएसडी जैसे महत्वपूर्ण पद रिक्त होने के चलते न्यास का कामकाज पूरी तरह से ठप है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता दयाराम दिव्य ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर इन पदों पर तत्काल अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की है।
विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पूर्व सचिव ललित गोयल को दो महीने पहले एपीओ किया गया था, जबकि ओएसडी चमनलाल मीणा का स्थानांतरण हो गया है। इन दोनों प्रमुख पदों के खाली रहने से न्यास के वित्तीय और प्रशासनिक कार्य रुक गए हैं। वर्तमान में सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में पट्टे बनाने और राजस्व कार्यों के सरलीकरण के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन इन महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों के अभाव में भीलवाड़ा के निवासियों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
प्रशासनिक शून्यता का असर केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव धरातल पर दिख रहा है। अधिकारियों के न होने से ठेकेदारों और कर्मचारियों के भुगतान अटके हुए हैं, जिसके कारण शहर के निर्माणाधीन विकास कार्य अधर में लटक गए हैं। मानसून का आगमन निकट है, ऐसे में यदि सड़कों, पार्कों और भवनों से संबंधित अधूरी योजनाओं को समय रहते पूर्ण नहीं किया गया, तो बारिश के कारण करोड़ों रुपये के विकास कार्य नष्ट हो सकते हैं। दयाराम दिव्य ने मुख्यमंत्री से यूआईटी के साथ-साथ पीडब्ल्यूडी और जिला कोष कार्यालय में रिक्त पदों को भरने का भी आग्रह किया है ताकि प्रशासनिक गतिरोध समाप्त हो सके और आमजन को राहत मिल सके।

