भीलवाड़ा में ऑल राजस्थान ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के राष्ट्रव्यापी/राज्यव्यापी आह्वान पर सोमवार को ट्रांसपोर्ट सेवाओं का पूर्ण रूप से चक्का जाम रहा। भीलवाड़ा गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित इस हड़ताल के चलते ट्रांसपोर्ट नगर पूरी तरह बंद रहा और सैकड़ों वाहन खड़े रहे।

भीलवाड़ा गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वबंधु सिंह राठौड़ ने बताया कि सरकार की दमनकारी नीतियों और लगातार बढ़ाए जा रहे टैक्स के विरोध में यह आंदोलन किया गया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में ट्रांसपोर्ट पर लगने वाला टैक्स पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। एसोसिएशन की मुख्य मांग है कि टैक्स को अन्य राज्यों के समान किया जाए।

राठौड़ ने बसों पर विभागीय कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि जिन बसों को विभाग द्वारा रजिस्ट्रेशन, पासिंग और परमिट दिए गए हैं, उन्हें सीज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा में 300 से अधिक और पूरे राजस्थान में करीब 30,000 बसें खड़ी हैं, जिससे बस संचालकों के सामने किश्तें चुकाने का संकट खड़ा हो गया है।

उन्होंने अधिकारियों पर भी संवाद नहीं करने का आरोप लगाया। राठौड़ ने कहा कि गत 8 तारीख को यदि अधिकारी पुरुषोत्तम शर्मा उनसे वार्ता कर लेते और उनकी समस्याओं को सुन लेते, तो आज चक्का जाम की स्थिति नहीं बनती।

हड़ताल के कारण भीलवाड़ा ट्रांसपोर्ट नगर में पूरी तरह तालाबंदी जैसी स्थिति रही। अध्यक्ष विश्वबंधु सिंह ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर में करीब 500 गाड़ियां खड़ी रहीं। इसके अलावा ट्रेलर एसोसिएशन और माइनिंग डिपार्टमेंट से चलने वाले वाहनों के समर्थन के बाद कुल 2000 से अधिक गाड़ियां भीलवाड़ा में खड़ी रहीं।

उन्होंने बताया कि एक दिन की इस हड़ताल से केवल भीलवाड़ा में ही 3 से 3.5 करोड़ रुपये के व्यापारिक नुकसान का अनुमान है।

आंदोलन के दौरान राठौड़ ने स्थानीय व्यापारियों से सहयोग और संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्टर्स ने वर्षों तक व्यापारियों की सेवा की है, इसलिए इस संकट की घड़ी में उन्हें भी आंदोलन में साथ देना चाहिए।

आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए आज एसोसिएशन की बैठक में एक ‘संघर्ष समिति’ का गठन किया जा रहा है। इसके साथ ही शहर में 8 से 10 विशेष दस्तों को तैनात किया जाएगा, जो निगरानी रखेंगे कि कोई भी वाहन चोरी-छिपे माल लोड या अनलोड न कर सके।

ट्रांसपोर्टर्स ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

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