भीलवाड़ा। जागीर कालीन गौरवशाली विरासत, पर्यावरण के सजग प्रहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गिरते जलस्तर की जीवनरेखा माना जाने वाला कोटड़ी तहसील के फलासेड़ ग्राम का 'धर्माउ तालाब' आज भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का खुला अड्डा बन चुका है। राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े रुख, राजस्व मंडल की तीखी फटकार और जिला कलेक्टर से लेकर एसडीओ तक के आदेशों को धता बताते हुए यहाँ पटवारी, गिरदावर और तथाकथित खाप पंचायत की मिलीभगत से जल, मिट्टी और संपदा की दिन-रात बेखौफ लूट जारी है। यह केवल प्राकृतिक संपदा की चोरी नहीं, बल्कि न्यायपालिका और प्रशासन के इकबाल को दी गई एक खुली चुनौती है।

फलासेड़ का यह ऐतिहासिक धर्माउ तालाब श्रीबिहारीजी महाराज स्थानदेह जीवनसिंह ट्रस्ट मन्दिरान रासेड़ के संरक्षण में आता है। दशकों से चली आ रही परंपरा और ट्रस्ट व ग्रामीणों की आपसी सहमति के अनुसार, यहाँ से जल निकासी, मछली पालन, शिकार और मिट्टी के दोहन पर पूर्णतः प्रतिबंध रहा है, जिसकी विधिवत सूचना हर वर्ष प्रशासन को दी जाती रही। किंतु बीते कुछ वर्षों में समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा का गंभीर आरोप है कि "खाप पंचायत" के नाम पर कुछ रसूखदार लोगों ने स्थानीय राजस्व अमले के संरक्षण में इस सार्वजनिक जल स्रोत को अपनी निजी खदान और ट्यूबवेल में तब्दील कर दिया है।

इस पूरे खेल में करीब एक करोड़ रुपये के बेजा लाभ का अनुमान लगाया जा रहा है। तालाब के भीतर अवैध रूप से बिजली कनेक्शन करवाकर भारी-भरकम पंप और मोटरें दौड़ाई जा रही हैं। लगभग 4 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर पानी की चोरी की जा रही है और किसानों से प्रति बीघा 1500 रुपये की अवैध वसूली हो रही है। इतना ही नहीं, वित्तीय वर्ष 2024-25 में हल्का पटवारी अभिषेक खांडाल, गिरदावर गोपाल शर्मा और खाप पंचायत गुर्जरान पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए मछली पालन का सवा छह लाख रुपये का ठेका ऐजाज मोहम्मद को देने का संगीन आरोप लगा है। आरोप है कि इस ठेके से प्राप्त बड़ी धनराशि को सरकारी राजकोष में जमा करने के बजाय मिलीभगत कर निजी जेबों में भर लिया गया।

तालाब की बदहाली और भ्रष्टाचार की यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। साक्ष्यों को मिटाने के लिए 4 जून 2025 को कथित तौर पर भगवानलाल गुर्जर से भारी रिश्वत लेकर पाइपलाइन को जमीन में दबवा दिया गया। इस दौरान 300 से अधिक ट्रैक्टर मिट्टी का अवैध उठाव हुआ और हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काटकर पूरे कैचमेंट एरिया को तहस-नहस कर दिया गया। जब ट्रस्ट व्यवस्थापक जमनालाल शर्मा ने 23 और 25 जून 2025 को पारोली थाने में गुहार लगाई और एसडीओ कोटड़ी ने जांच बिठाई, तो व्यवस्था की विडंबना देखिए कि जांच उसी पटवारी को सौंप दी गई जिस पर आरोप थे। नतीजा वही रहा—शून्य। पत्थरगड़ी के आदेश के बदले भी गिरदावर पर 9 हजार रुपये की घूस मांगने के आरोप सार्वजनिक हुए हैं।

न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना का आलम यह है कि 10 मई 2019 को राजस्थान हाईकोर्ट ने खसरा संख्या 28, 36, 170, 175, 702/190, 144, 154 सहित पूरे कैचमेंट एरिया से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। छह साल बीत जाने के बाद भी न तो पटवारी ने सुध ली और न ही तहसीलदार या पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई की। इसके उलट, राजस्व मंडल अजमेर द्वारा नायब तहसीलदार श्रीलाल मीणा, पटवारी अभिषेक खांडाल और गिरदावर गोपाल शर्मा के खिलाफ जांच के आदेश के बावजूद उन्हें पदोन्नति दे दी गई, जो प्रशासनिक शुचिता पर बड़े सवाल खड़े करता है।

हाल ही में कोटड़ी एसडीओ ने स्वयं मौके का मुआयना किया और 5 दिसंबर 2025 को संयुक्त जांच रिपोर्ट के निर्देश दिए, लेकिन वह रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में है। ट्रस्ट व्यवस्थापक का दावा है कि अब उन्हें धमकाया जा रहा है और नई समितियों में भी उन्हीं लोगों को शामिल कर लिया गया है जो संदेह के घेरे में हैं। फिलहाल फलासेड़-रासेड़ के ग्रामीण दहशत में हैं और अपनी विरासत को लुटता देख आक्रोशित हैं। जमनालाल शर्मा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अब भी अपनी कुंभकर्णी नींद नहीं त्यागी, तो वे दोबारा हाईकोर्ट की शरण लेंगे। सवाल अब भी वही खड़ा है—क्या रसूखदारों और भ्रष्ट कारिंदों का यह गठबंधन अदालती आदेशों से भी ऊपर है?

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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