भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले का नंदराय कस्बा इन दिनों शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता और छात्रों के अडिग संकल्प का केंद्र बना हुआ है। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भूगोल के व्याख्याता शंकरलाल जाट के स्थानांतरण ने एक ऐसी चिंगारी सुलगा दी है, जिसने अब उग्र आंदोलन का रूप धारण कर लिया है। "विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीति" की तर्ज पर छात्रों ने तीन दिनों तक शांतिपूर्ण प्रतीक्षा की, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी ने अब उन्हें आर-पार की लड़ाई के लिए मजबूर कर दिया है। विद्यालय के मुख्य द्वार पर जमे छात्र-छात्राओं के चेहरे पर आक्रोश और आंखों में अपने प्रिय शिक्षक को वापस पाने की जिद साफ देखी जा सकती है।

आंदोलन के तीसरे दिन बुधवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब छात्र हाथों में सामूहिक टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) कटवाने के प्रार्थना पत्र लेकर स्कूल पहुंच गए। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि यदि उनके मार्गदर्शक शंकरलाल जाट का तबादला निरस्त नहीं किया गया, तो वे इस विद्यालय को छोड़ देंगे। पिछले सात वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षक शंकरलाल जाट के प्रति यह अनुराग केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के अनुसार उन्होंने उनके जीवन की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई है। छात्रा यामिनी तेली ने अत्यंत भावुक और दृढ़ स्वर में दो टूक कहा कि यदि उनके गुरु वापस नहीं आते हैं, तो सभी विद्यार्थी एक साथ अपनी टीसी कटवाकर स्कूल को अलविदा कह देंगे।

यह विरोध प्रदर्शन अब केवल नारेबाजी तक सीमित नहीं रहा है। छात्रों ने प्रशासनिक अनदेखी पर कड़ा प्रहार करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शिक्षा विभाग की नींद नहीं खुली, तो वे आमरण अनशन जैसा आत्मघाती कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। आश्चर्य का विषय यह है कि तीन दिनों से जारी इस गतिरोध के बावजूद अब तक जिला शिक्षा विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। यह प्रशासनिक शून्यता कई गंभीर सवाल खड़े करती है कि क्या आज की व्यवस्था में विद्यार्थियों की भावनाओं और गुरु-शिष्य परंपरा का कोई मोल शेष नहीं रह गया है।

नंदराय का यह आंदोलन अब केवल एक शिक्षक के तबादले का विरोध मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और संवेदनशीलता की परीक्षा बन चुका है। ग्रामीण और विद्यार्थी एकजुट होकर इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। जिस प्रकार बुधवार को स्कूल का मुख्य द्वार टीसी के आवेदनों से पट गया, उसने पूरे जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। अब देखना यह है कि क्या विभाग इन नौनिहालों के भविष्य और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए कोई सकारात्मक कदम उठाता है या फिर यह आक्रोश किसी बड़े प्रशासनिक संकट का रूप लेगा।

Pratahkal Bureau

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