भीलवाड़ा। राजस्थान की मरुधरा पर सामाजिक और आर्थिक न्याय की प्रतीक्षा में बैठा मंसूरी समाज अब अपने अस्तित्व और उत्थान के लिए निर्णायक लड़ाई के मूड में है। प्रदेश में लगभग 30 से 40 लाख की विशाल आबादी होने के बावजूद, यह समाज आज भी हाशिए पर खड़ा है। पारंपरिक रूप से रजाई-गद्दे बनाने, तेल घाणी और मजदूरी जैसे श्रमसाध्य कार्यों से जुड़ा यह वर्ग शैक्षणिक और आर्थिक मोर्चे पर आजादी के सात दशकों बाद भी पिछड़ा हुआ है। विशेषकर पिछले दो दशकों में बढ़ते मशीनीकरण और औद्योगिक क्रांति ने इनके पुश्तैनी व्यवसायों को पूरी तरह चौपट कर दिया है, जिससे आज समूचा समाज भीषण बेरोजगारी और बदहाली के दौर से गुजर रहा है।

सामाजिक न्याय की इस मुहिम को धार देते हुए प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता मुबारक मंसूरी उपरेडा ने समाज की इस व्यथा को पुरजोर तरीके से शासन के समक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार राज्य सरकार ने पिछले पांच वर्षों में विभिन्न जातियों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए वीर तेजाजी बोर्ड, देवनारायण बोर्ड, रजत कला कल्याण बोर्ड और केश कला बोर्ड जैसे विशिष्ट विकास बोर्डों का गठन कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा है, ठीक उसी तर्ज पर मंसूरी समाज भी पिछले दस वर्षों से 'मंसूरी विकास बोर्ड' के गठन की न्यायसंगत मांग कर रहा है। अपनी मांगों को लेकर राजस्थान के सभी जिलों से जिला कलेक्टरों को समय-समय पर ज्ञापन सौंपे गए हैं, लेकिन परिणाम अब तक शून्य रहा है।

इस संघर्ष की दास्तां केवल कागजों तक सीमित नहीं है। मुबारक मंसूरी उपरेडा के नेतृत्व में समाज की पीड़ा को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए गए हैं। इसी कड़ी में ढाई वर्ष पूर्व, 7 जून 2023 से 19 जून 2023 तक भीलवाड़ा जिला मुख्यालय से लेकर जयपुर मुख्यमंत्री आवास तक एक साहसिक पदयात्रा निकाली गई थी। भीषण गर्मी की परवाह किए बिना मुबारक मंसूरी ने विजयनगर, नसीराबाद, अजमेर और किशनगढ़ होते हुए सैकड़ों समाजजनों के साथ जयपुर तक का सफर पैदल तय किया था। उस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा समाज को उचित मांगें पूरी करने का आश्वासन भी दिया गया था, किंतु समय बीतने के साथ वे वादे केवल सरकारी फाइलों में दबकर रह गए।

वर्तमान में भीलवाड़ा जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त अजमेर, अल्पसंख्यक मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और महामहिम राज्यपाल तक को सैकड़ों पत्राचार किए जा चुके हैं। समाज का कहना है कि उनकी मांग केवल एक बोर्ड के गठन की नहीं, बल्कि अपने खोए हुए रोजगार को पुनः प्राप्त करने और आत्मनिर्भर बनने की है। मुबारक मंसूरी उपरेडा और समस्त मंसूरी समाज ने सरकार से पुरजोर अपील की है कि शीघ्र ही 'मंसूरी विकास बोर्ड' का गठन कर कल्याणकारी योजनाएं लागू की जाएं, ताकि इस पिछड़े वर्ग को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में उचित स्थान और राहत मिल सके।

Pratahkal Bureau

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