भीलवाड़ा: मांडलगढ़ के आंमा गांव में प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा, गंदगी और कीचड़ के बीच 'अंतिम विदाई' को मजबूर ग्रामीण
भीलवाड़ा के मांडलगढ़ स्थित आंमा गांव में प्रशासनिक अनदेखी के कारण श्मशान घाट बदहाली का केंद्र बना हुआ है। कीचड़, गंदगी और टीन शेड के अभाव में ग्रामीण तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। गणेश लाल जरवाल के निधन पर फूटा ग्रामीणों का आक्रोश और विधायक गोपाल खंडेलवाल का आश्वासन—क्या सुधरेगी आंमा की सूरत? पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

भीलवाड़ा। मृत्यु को जीवन का अंतिम और शाश्वत सत्य माना गया है, जहां शास्त्र और समाज एक गरिमामय विदाई की वकालत करते हैं। परंतु भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत आंमा में यह मानवीय गरिमा प्रशासनिक उपेक्षा की भेंट चढ़ चुकी है। यहाँ का श्मशान घाट विकास के तमाम दावों को मुंह चिढ़ाते हुए बदहाली का जीवंत प्रतीक बन गया है। अपनों को खोने का गम झेल रहे परिजनों के लिए यहाँ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया किसी नर्क समान परीक्षा से कम नहीं है, जहाँ उन्हें बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गंदगी और संक्रमण के साए में खड़ा होना पड़ता है।
आंमा गांव के इस श्मशान घाट की स्थिति वर्तमान में किसी कचरा घर से बदतर हो चली है। यहाँ लगा टीन शेड वर्षों पहले गायब हो चुका है, जिसके कारण मानसून के दौरान शव का दाह संस्कार करना लगभग असंभव हो जाता है। बारिश के समय ग्रामीण तिरपाल का सहारा लेकर भीगते हुए अंतिम क्रिया संपन्न करने को विवश हैं। श्मशान तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह कीचड़ और मलबे से अटा पड़ा है, वहीं तालाब की पाल पर पसरी गंदगी और उससे उठती असहनीय दुर्गंध ने शोक संतप्त लोगों का बैठना तक दूभर कर दिया है। कटीली झाड़ियों और अव्यवस्थाओं के बीच न तो बैठने की उचित व्यवस्था है और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम, जो सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की संवेदनहीन कार्यप्रणाली को उजागर करता है।
हाल ही में आंमा निवासी गणेश लाल जरवाल के निधन के पश्चात आयोजित अंतिम संस्कार में ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। इस दुखद घड़ी में शामिल होने पहुंचे आंमा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ा, जिससे समूचे गांव में प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामवासी एडवोकेट बालकृष्ण पुरोहित ने इस कुप्रबंधन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन को कई बार लिखित और मौखिक रूप से गुहार लगाई गई है, लेकिन आज तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दुख की इस घड़ी में व्याप्त यह अव्यवस्थाएं परिजनों की पीड़ा को और अधिक बढ़ा देती हैं।
इस गंभीर मुद्दे पर गांव के प्रबुद्ध नागरिकों, जिनमें बालकिशन पुरोहित, सुखदेव जरवाल और राधेश्याम तेली सहित दर्जनों ग्रामीण शामिल हैं, ने पुरजोर तरीके से आवाज उठाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच गोपाल सुवालका को बार-बार समस्या से अवगत कराने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। एक ओर जहाँ देश डिजिटल इंडिया और स्मार्ट विलेज के बड़े सपने देख रहा है, वहीं आंमा जैसे गांवों में इंसान को अपने अंतिम सफर तक में सम्मान नसीब नहीं हो रहा है। हालांकि, इस मामले में मांडलगढ़ विधायक गोपाल खंडेलवाल ने संज्ञान लेते हुए शीघ्र ही श्मशान घाट की व्यवस्थाएं सुधारने और विकास कार्य कराने का आश्वासन दिया है। अब क्षेत्र की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विधायक का यह आश्वासन धरातल पर उतरेगा या मृतकों की गरिमा यूं ही कटीली झाड़ियों और कीचड़ में दम तोड़ती रहेगी।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
