भीलवाड़ा: ‘हे गोविंद थारो सायरो’ के उद्घोष से गुंजायमान हुआ गायत्री माता मंदिर, नानी बाई का मायरा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
भीलवाड़ा के गायत्री माता मंदिर में 'नानी बाई का मायरा' कथा की भव्य पूर्णाहुति हुई। संत प्रहलाद 'मुस्कान' के सुरीले भजनों और नरसी भगत की भक्ति गाथा ने हजारों महिला श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। महाआरती और झांकियों के साथ संपन्न हुए इस कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

भीलवाड़ा। भक्ति, भाव और समर्पण की त्रिवेणी जब एक साथ प्रवाहित होती है, तो हृदय का कोना-कोना कृष्णमय हो जाता है। कुछ ऐसा ही अलौकिक दृश्य भीलवाड़ा के कोटा रोड स्थित अहिंसा सर्किल पर देखने को मिला, जहाँ श्री गायत्री माता मंदिर परिसर में आयोजित ‘नानी बाई का मायरा’ की पूर्णाहुति पर श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं का अपार जनसमूह उमड़ पड़ा। नरसी भगत की अटूट भक्ति और भगवान श्री कृष्ण द्वारा उनके मान-सम्मान की रक्षा की इस अमर गाथा ने उपस्थित हर भक्त को भाव-विभोर कर दिया।
आयोजन की गरिमा को व्याख्यायित करते हुए मंच संचालक कवि रामनिवास रोनीराज ने बताया कि इस पावन कथा का वाचन प्रसिद्ध कथा वाचक संत रज श्री प्रहलाद ‘मुस्कान’ के मुखारविंद से किया गया। संगीतमय वाचन की मधुरता ऐसी थी कि प्रत्येक शब्द सीधा श्रोताओं के अंतर्मन में उतर रहा था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रथम दिवस पर भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ था, जो पूगता हनुमान मंदिर शिवनगर से प्रारंभ होकर तिलक नगर सहित मुख्य मार्गों से होती हुई कथा स्थल तक पहुँची थी। द्वितीय दिवस की आध्यात्मिक सभा में महंत 1008 श्री जय राम दास जी महाराज के पावन सानिध्य में संतों ने कथा वाचक ‘मुस्कान’ का शाल ओढ़ाकर अभिनंदन किया, जो भक्ति मार्ग में संतों के प्रति आदर की परंपरा को दर्शाता है।
पूर्णाहुति के अवसर पर पूरा पंडाल सुरीले भजनों और झांकियों के आकर्षण से जीवंत हो उठा। राधा-कृष्ण, नानी बाई और नरसी भगत की मनमोहक झांकियों ने आध्यात्मिक वातावरण में चार चाँद लगा दिए। जैसे ही कथा के बीच ‘सतगुरु तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया’, ‘ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने’, ‘हमारो धन राधा श्री राधा श्री राधा’ और ‘पायोजी मैंने राम रतन धन पायो’ जैसे भजनों की रसधार बही, भक्तगण स्वयं को थिरकने से रोक न सके। जब कथा व्यास ने ‘म्हारी हुंडी स्वीकारो महाराज रे सांवरो गिरधारी’ और ‘पधारो महारा नटवर नागरिया’ जैसे भावपूर्ण पदों का गायन किया, तो पूरा परिसर भक्ति के चरम आनंद में डूब गया। कवि रोनीराज ने अपनी विशिष्ट शैली में भक्तिमय सूक्तियों और छंदों के माध्यम से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर शब्दों के जादुई प्रवाह में बांधे रखा।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में समाज के विभिन्न वर्गों और गणमान्य नागरिकों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। इस अवसर पर खटीक समाज के जिला अध्यक्ष बंशीलाल पटेल, अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियन ज्ञानमल खटीक, अध्यापक मूलचंद पांचाल, कोहिनूर के शहर अध्यक्ष रामचंद्र मुंदड़ा, डॉ. उषा अग्रवाल, रामू बुआ गुर्जर, मगन सिंह राणावत, सांवरमल वैष्णव और सुरेश सुखवाल उपस्थित रहे। साथ ही भगवानी देवी खटीक, सीता देवी चंदेल, कृष्णा देवी पांचाल, टीना शर्मा, हेमलता शर्मा, विद्या सोनी, उषा साहू, सुहासनी राठी, कौशल्या मैडम और पूर्व पार्षद सत्यनारायण सहित अनेक भक्तों का सराहनीय सहयोग रहा। कथा के समापन पर भव्य महाआरती उतारी गई और उपस्थित जनमेदिनी में महाप्रसाद का वितरण किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसने भीलवाड़ा की सांस्कृतिक एकता और भक्ति परंपरा को और अधिक सुदृढ़ किया।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
