भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा के बीचों-बीच से गुजरने वाली मेजा बांध की मुख्य नहर अब शहरवासियों के लिए जीवनदायिनी के बजाय मुसीबत का सबब बनती जा रही है। करीब पांच दशकों का सफर तय कर चुकी यह नहर आज अपने अस्तित्व की अंतिम सांसें गिन रही है, जिसका खामियाजा बापूनगर और चंद्रशेखर आजाद नगर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों के निवासियों को भुगतना पड़ रहा है। बदहाली का आलम यह है कि नहर की जर्जर दीवारों से पानी उफान मारकर लोगों के घरों और सड़कों पर तांडव मचा रहा है, जिससे न केवल जनजीवन अस्त-व्यस्त है बल्कि मकानों की नींव पर भी खतरा मंडराने लगा है।

इस गंभीर समस्या को देखते हुए उपभोक्ता अधिकार समिति (रजि.) ने मोर्चा खोल दिया है। समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सुनील राठी, केंद्रीय प्रकोष्ठ महिला अध्यक्ष व पूर्व सभापति मधु जाजू और केंद्रीय मानवाधिकार अध्यक्ष अशोक सोडाणी के संयुक्त नेतृत्व में पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता के कार्यालय पहुंचा। समिति ने क्षेत्रवासियों की पीड़ा को ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के सामने रखा और विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त किया।

घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए युवा मोर्चा के अंकित सोमानी ने बताया कि यह 50 साल पुरानी नहर उचित रखरखाव के अभाव में जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। दरारें इतनी गहरी हैं कि पानी रिसाव के कारण सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी रहती है, जिससे यातायात बाधित हो रहा है। वहीं, महिला जिलाध्यक्ष अर्चना दुबे ने क्षेत्र के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि नहर में जमा मलबे और गंदगी की वजह से उठने वाली दुर्गंध ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। इससे महामारी फैलने का अंदेशा बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, नहर की मुंडेर (सुरक्षा दीवार) इतनी नीची है कि आए दिन बेसहारा गोवंश और अन्य मवेशी इसमें गिरकर अकाल मृत्यु का शिकार हो रहे हैं।

ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति ने दो टूक शब्दों में प्रशासन से मांग की है कि नहर की तत्काल मरम्मत की जाए, जमा कचरे की युद्ध स्तर पर सफाई हो और सुरक्षा की दृष्टि से मुंडेर को ऊंचा किया जाए। इस अवसर पर हार्दिक सोनी, त्रिदेव मूंदड़ा, लादूराम वैष्णव और अशोक सोमानी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे। शहर के बीचों-बीच बहती इस नहर का जीर्णोद्धार केवल तकनीकी जरूरत नहीं, बल्कि हजारों जिंदगियों की सुरक्षा से जुड़ा मानवीय पहलू बन गया है। यदि समय रहते सिंचाई विभाग ने सुध नहीं ली, तो यह जर्जर संरचना किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

Pratahkal Bureau

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