रामस्नेही चिकित्सालय में टीबी जागरूकता व स्वच्छता कार्यक्रम, टीबी मुक्त भारत के संकल्प को मिला जनसहयोग
भीलवाड़ा के रामस्नेही चिकित्सालय में टीबी जागरूकता एवं स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित हुआ। विशेषज्ञों ने समय पर जांच, पूर्ण उपचार और जनभागीदारी से टीबी मुक्त भारत का संदेश दिया।

तस्वीर में भीलवाड़ा के एक हॉल में आयोजित टीबी मुक्त भारत जागरूकता कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथि, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और विद्यार्थी बैनर लेकर खड़े हैं।
नगर निगम भीलवाड़ा के स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) एवं रामस्नेही चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र, भीलवाड़ा के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को "टीबी मुक्त भारत – हमारा संकल्प, टीबी का अंत" विषय पर व्यापक टीबी जागरूकता एवं स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य रोगियों, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, विद्यार्थियों एवं आमजन को टीबी के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करना तथा टीबी मुक्त भारत अभियान को जन-आंदोलन बनाना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रणेता स्वामी श्री 1008 रामचरण जी महाराज के स्वरूप पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर नगर निगम, भीलवाड़ा द्वारा स्वच्छता एवं जनसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों का सम्मान भी किया गया।
स्वच्छ भारत मिशन (SBM) शाखा की टीम लीडर डॉ. हेमलता सहल ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने बताया कि अथर्ववेद में "यक्ष्मा" नामक रोग का उल्लेख मिलता है, जिसे आयुर्वेद में राजयक्ष्मा कहा गया है। इससे स्पष्ट होता है कि हमारे ऋषि-मुनि प्राचीन काल से ही स्वच्छता, स्वास्थ्य संरक्षण एवं रोगों की रोकथाम के प्रति सजग थे। उन्होंने बताया कि टीबी की वैज्ञानिक पहचान 24 मार्च 1882 को जर्मन वैज्ञानिक डॉ. रॉबर्ट कॉख द्वारा Mycobacterium tuberculosis जीवाणु की खोज से हुई थी। इसी उपलब्धि की स्मृति में प्रतिवर्ष 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का लक्ष्य देश को टीबी मुक्त भारत बनाना है और इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. हेमलता सहल ने उपस्थित रोगियों से संवाद करते हुए स्वच्छता, वेस्ट सेग्रीगेशन (कचरा पृथक्करण) तथा व्यक्तिगत स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उनके आसपास किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखाई दें तो उससे किसी प्रकार का भेदभाव न करें, बल्कि उसे निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि टीबी पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है तथा सरकार द्वारा इसकी जांच और उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इसलिए टीबी से डरने की नहीं, बल्कि समय पर जांच एवं पूरा उपचार कराने की आवश्यकता है।
रामस्नेही चिकित्सालय के जनरल फिजिशियन डॉ. राकेश मुंदड़ा ने नर्सिंग स्टाफ, विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों को टीबी के लक्षण, बचाव एवं उपचार के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी रहना, बलगम या खून आना, लगातार बुखार, रात में अत्यधिक पसीना आना, वजन कम होना, भूख न लगना तथा अत्यधिक कमजोरी टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र में जांच करवानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि टीबी से बचाव के लिए खांसते एवं छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल या टिश्यू से ढंकना, घर एवं कार्यस्थल पर पर्याप्त धूप और स्वच्छ हवा का प्रबंध रखना, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना तथा चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाइयों का पूरा कोर्स करना अत्यंत आवश्यक है। डॉ. राकेश मुंदड़ा ने टीबी रोगियों के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि रोगियों को प्रोटीन युक्त भोजन, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, दालें, अंकुरित अनाज, सोयाबीन, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, सूखे मेवे तथा पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पौष्टिक आहार से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे उपचार अधिक प्रभावी होता है और रोगी शीघ्र स्वस्थ होता है। उन्होंने सभी से टीबी के प्रति किसी भी प्रकार का भय या भेदभाव न रखने तथा समय पर जांच एवं पूर्ण उपचार अपनाने की अपील की।
स्वच्छ भारत मिशन (SBM) शाखा के नोडल अधिकारी श्री सूर्यप्रकाश संचेती ने कार्यक्रम के दौरान रामस्नेही चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सतीश पांडेय, डॉ. पवन ओला एवं अन्य चिकित्सकों के साथ टीबी उन्मूलन अभियान, स्वच्छता एवं जनभागीदारी को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नर्सिंग स्टाफ एवं विद्यार्थियों को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP), संक्रमण नियंत्रण, वेस्ट सेग्रीगेशन तथा सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और सभी से अपने परिवार एवं समाज में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने तथा संदिग्ध मरीजों को समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर रामस्नेही कॉलेज के ट्रस्टी श्री बद्रीनारायण जी लढ़ा ने सभी अतिथियों, चिकित्सकों, अधिकारियों, नर्सिंग स्टाफ, विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनजागरूकता, स्वच्छता, समय पर जांच और सामूहिक प्रयासों से ही टीबी मुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है। कार्यक्रम में रामस्नेही चिकित्सालय के चिकित्सकगण, नर्सिंग स्टाफ, विद्यार्थी, स्वच्छ भारत मिशन की टीम तथा बड़ी संख्या में रोगी एवं उनके परिजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने टीबी के प्रति जागरूकता, स्वच्छता, समय पर जांच और पूर्ण उपचार के महत्व को रेखांकित करते हुए टीबी मुक्त भारत के संकल्प को जनभागीदारी से मजबूत करने का संदेश दिया।

Anshul Toshniwal, Bhilwara
नाम: अंशुल तोषनीवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): सभी प्रकार के समाचार (General Reporting)
अनुभव: 6 माह
परिचय
अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।
