भीलवाड़ा। जनपद के बागोर कस्बे से एक अत्यंत दुखद और हृदयविदारक समाचार सामने आया है, जिसने समूचे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। बागोर अंजुमन कमेटी (आम मुसलमान कमेटी) के ऊर्जावान और लोकप्रिय निर्वाचित सदर लियाकत हुसैन शेख अब हमारे बीच नहीं रहे। आज हुए उनके आकस्मिक इंतकाल की खबर जैसे ही हवा के झोंके की तरह फैली, पूरे बागोर कस्बे सहित आसपास के इलाकों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई। एक ऐसे व्यक्तित्व का असमय चले जाना, जिसने सदैव समाज की सेवा को सर्वोपरि रखा, क्षेत्र के लिए किसी बड़े आघात से कम नहीं है।

अपने प्रिय नेता और कर्मठ समाजसेवी के प्रति अंतिम सम्मान प्रकट करने के लिए बागोर के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने एक मिसाल पेश की। लियाकत साहब के प्रति अटूट प्रेम और सम्मान का आलम यह था कि बिना किसी पूर्व घोषणा के, लोगों ने स्वतः स्फूर्त होकर अपने प्रतिष्ठान और कारोबार पूरी तरह बंद रखे। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और हर आंख नम नजर आई। मात्र 52 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कहने वाले लियाकत हुसैन शेख अपने पीछे सादगी, ईमानदारी और मिलनसारिता की वो विरासत छोड़ गए हैं, जिसे लोग वर्षों तक याद रखेंगे।

अपने कार्यकाल के दौरान लियाकत हुसैन शेख ने केवल एक पद की गरिमा ही नहीं बढ़ाई, बल्कि मुस्लिम समाज के हक, उत्थान और प्रगति के लिए निरंतर संघर्ष किया। उन्होंने समाज की भलाई और विकास के लिए जो महत्वपूर्ण कदम उठाए, वे उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण थे। मरहूम के अंतिम सफर यानी जनाजे की नमाज जामा मस्जिद (गुल मंडी) के इमाम हजरत मौलाना हाफिजुर रहमान साहब द्वारा मुकम्मल करवाई गई। इस गमगीन घड़ी में उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसमें स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ क्षेत्र के कई प्रबुद्ध जन और गणमान्य हस्तियां शामिल हुईं।

इस अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त करते हुए अंजुमन कमेटी उप नगर (पुर) के सदर रमजान मोहम्मद शोरगर ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि लियाकत साहब का इंतकाल समाज के लिए एक ऐसा शून्य पैदा कर गया है जिसे भरना असंभव है। उन्होंने न केवल समाज को एकजुट करने का कार्य किया, बल्कि हमेशा उन्नति की नई राहें प्रशस्त कीं। लियाकत हुसैन शेख का जाना वास्तव में एक युग का अंत है, लेकिन उनके द्वारा किए गए सेवा कार्य और सामाजिक समरसता के प्रयास सदैव मार्गदर्शक के रूप में जीवित रहेंगे।

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