कावाखेड़ा सरकारी स्कूल में होमवर्क न करने पर छात्रा को दी गई अमानवीय सजा, शिक्षिका कृष्णा सुथार पर कार्रवाई की मांग।

भीलवाड़ा (प्रात:काल संवाददाता)। राजस्थान के भीलवाड़ा शहर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कावाखेड़ा में अनुशासन के नाम पर एक मासूम छात्र को अमानवीय शारीरिक प्रताड़ना देने का रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला प्रकाश में आया है। विद्यालय में 8वीं कक्षा के 14 वर्षीय छात्र को दी गई इस सजा के कारण उसकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वह स्कूल परिसर में ही सुध-बुध खोकर बेहोश हो गया। इस घटना की सूचना मिलते ही छात्र के परिजनों सहित बड़ी संख्या में लोग विद्यालय पहुँच गए, जिसके चलते वहाँ काफी देर तक हंगामा होता रहा।

पीड़ित छात्र की माता सुल्ताना बानो ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि स्कूल की शिक्षिका कृष्णा मैडम ने उनके बेटे को दंड स्वरूप 200 उठक-बैठक लगाने का आदेश दिया था। परिजनों का कहना है कि परसों भी इसी छात्र को 100 उठक-बैठक लगवाई गई थी, जिसके कारण उसके पैरों में तीव्र दर्द था और उसे उपचार हेतु निजी अस्पताल से दवा दिलानी पड़ी थी। आज उसी शारीरिक अवस्था में शिक्षिका ने पुनः रहम न दिखाते हुए उसे 200 उठक-बैठक लगाने पर मजबूर किया, जिसे छात्र का शरीर सहन नहीं कर पाया और वह मौके पर ही गिर पड़ा। उल्लेखनीय है कि पीड़ित बच्चे का एडमिशन अभी प्रक्रियाधीन था और वह वर्तमान में केवल शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से स्कूल जा रहा था।

मामले के तूल पकड़ने पर स्कूल के कार्यवाहक इंचार्ज प्रदीप मेहता ने प्रशासन का बचाव करते हुए तर्क दिया कि शिक्षिका कृष्णा सुथार बीएड इंटर्नशिप पर हैं। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि छात्र पढ़ाई के दौरान शैतानी कर रहे थे, इसलिए उन्हें सजा दी गई। हालांकि, इंचार्ज ने 200 उठक-बैठक की बात को सिरे से नकारते हुए दावा किया कि केवल 50-60 उठक-बैठक ही लगवाई गई थीं। घटना के बाद जब मीडिया और आक्रोशित लोगों का दबाव बढ़ा, तो आरोपी शिक्षिका विद्यालय छोड़कर चली गई। फिलहाल छात्र को उपचार हेतु अस्पताल ले जाया गया है, जहाँ उसका इलाज जारी है। पीड़ित परिवार ने विद्यालय प्रशासन और उच्च अधिकारियों से दोषी शिक्षिका के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। यह घटना शिक्षा के मंदिर में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन की सीमाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

Pratahkal HQ

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