भीलवाड़ा: विशेष बच्चों के लिए भारत विकास परिषद का 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर
सेवा आश्रम विद्यालय में आयोजित शिविर में 39 बौद्धिक दिव्यांग और दृष्टिहीन बच्चे संगीत, पेंटिंग और तकनीकी उपकरणों का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

भीलवाड़ा के पटेल नगर स्थित सेवा आश्रम विद्यालय में आयोजित 10 दिवसीय शिविर के दौरान संगीत और नृत्य के सत्र में उत्साह के साथ भाग लेते विशेष बच्चे।
शारीरिक और मानसिक चुनौतियों के बावजूद आत्मविश्वास और प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ने का जज्बा इन दिनों भीलवाड़ा के पटेल नगर स्थित सेवा आश्रम विद्यालय में जीवंत रूप से दिखाई दे रहा है। भारत विकास परिषद की स्वामी विवेकानंद शाखा द्वारा ‘सेवा परमो धर्म:’ के संकल्प के साथ विशेष बौद्धिक दिव्यांग भाइयों और दृष्टिहीन बालक-बालिकाओं के लिए 10 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 39 बच्चों ने उत्साहपूर्वक पंजीकरण कराया है।
रोजाना सुबह 8:00 बजे से 10:30 बजे तक चलने वाला यह शिविर सेवा, समर्पण और आत्मनिर्भरता का प्रेरणादायी केंद्र बना हुआ है। सेवा आश्रम विद्यालय परिसर में विशेष बच्चों की मुस्कान, उत्साह और सीखने की ललक वातावरण को जीवंत बना रही है। शिविर के माध्यम से बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेष प्रशिक्षण सत्रों में बौद्धिक रूप से अक्षम बच्चे संगीत की मधुर धुनों पर डांस के स्टेप्स सीख रहे हैं। वहीं रंग-बिरंगी पेंटिंग और रचनात्मक गतिविधियों के जरिए वे अपनी भावनाओं और सपनों को कागज पर उकेर रहे हैं। बच्चों की मानसिक एकाग्रता और बौद्धिक क्षमता विकसित करने के लिए लूडो सहित अन्य दिमागी खेलों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
शिविर का सबसे प्रेरणादायी पक्ष दृष्टिहीन बालक-बालिकाओं को आधुनिक तकनीकी उपकरणों का प्रशिक्षण देना है। परिषद द्वारा उपलब्ध कराए गए इन विशेष उपकरणों के माध्यम से बच्चों को दैनिक जीवन अधिक सुगम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे अंधकार को चुनौती देकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
भारत विकास परिषद स्वामी विवेकानंद शाखा के पदाधिकारी और विशेषज्ञ प्रशिक्षक पूरी तन्मयता और स्नेह के साथ बच्चों की प्रतिभा निखारने में जुटे हैं। प्रत्येक बच्चे पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया जा रहा है, जिससे उनकी क्षमता और आत्मविश्वास दोनों को मजबूती मिल रही है।
ढाई घंटे तक चलने वाले अभ्यास और प्रशिक्षण सत्र के बाद परिषद द्वारा सभी 39 बच्चों के लिए शुद्ध, सात्विक और पौष्टिक अल्पाहार की व्यवस्था भी की जाती है। सामूहिक रूप से बैठकर भोजन करने से बच्चों में सामाजिकता, समरसता और आपसी प्रेम की भावना मजबूत हो रही है।
शाखा पदाधिकारियों ने बताया कि परिषद का उद्देश्य विशेष बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना और 70 वर्षों की सनातन सेवा परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सेवा पहुंचाना है। भीलवाड़ा में आयोजित यह विशेष प्रशिक्षण शिविर न केवल दिव्यांग और दृष्टिहीन बच्चों की प्रतिभा को मंच दे रहा है, बल्कि समाज को संवेदनशीलता, समरसता और मानव सेवा का मजबूत संदेश भी दे रहा है।

Pratahkal Bureau
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