भीलवाड़ा। आधुनिकता की दौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच नशा आज समाज के लिए एक नासूर बनता जा रहा है। इसी गंभीर समस्या के उन्मूलन और स्वस्थ समाज के निर्माण के उद्देश्य से भीलवाड़ा में 'नशामुक्त भारत अभियान' के तहत एक प्रभावी पहल की गई। सोशियल वेल्फेयर सोसायटी, भीलवाड़ा के तत्वावधान में आज एक नि:शुल्क नशारोग एवं मनोरोग परामर्श शिविर के साथ-साथ जागरूकता सेमिनार का भव्य आयोजन दाई हलिमा मैटरनिटी एवं जनरल हॉस्पिटल में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल नशे के शिकार व्यक्तियों को उपचार की राह दिखाई, बल्कि समाज के प्रबुद्ध वर्ग को इस सामाजिक बुराई के विरुद्ध एकजुट होने का संदेश भी दिया।

सेमिनार की मुख्य वक्ता और सुप्रसिद्ध मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नसीम जहां ने अपनी विस्तृत पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से नशे के मकड़जाल की वैज्ञानिक और सामाजिक परतों को खोला। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को नशे के विभिन्न प्रकारों और लत लगने के मनोवैज्ञानिक कारणों से अवगत कराया। डॉ. नसीम ने भावुक लेकिन तार्किक ढंग से समझाया कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसके शरीर, परिवार, समाज और अंततः पूरे राष्ट्र की जड़ों को खोखला कर देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नशे की बीमारी से मुक्ति संभव है, बशर्ते रोगी को परिवार का संबल और समाज का सकारात्मक दृष्टिकोण प्राप्त हो। उपचार की प्रक्रिया में समाज की भूमिका को उन्होंने सबसे अहम कड़ी बताया।

कानून और व्यवस्था के दृष्टिकोण से नशे के खतरों को रेखांकित करते हुए मुख्य अतिथि सुभाषनगर थानाधिकारी कैलाश विश्नोई ने एक कड़वी सच्चाई साझा की। उन्होंने कहा कि जिस समाज या क्षेत्र में नशे का प्रचलन अधिक होता है, वहां अपराधों का ग्राफ स्वतः ही ऊपर चला जाता है। विश्नोई ने विश्वास जताया कि ऐसे जागरूकता सेमिनार पुलिस के कार्यभार को कम करने में सहायक सिद्ध होंगे, क्योंकि जब नशे की लत कम होगी तो आपराधिक प्रवृत्तियों में भी भारी गिरावट आएगी। उन्होंने अभिभावकों और समाज से अपील की कि वे युवाओं को केवल किताबी ज्ञान न देकर खेलकूद और स्वस्थ मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराएं, ताकि उनकी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में प्रवाहित हो सके और वे देश की प्रगति में भागीदार बनें।

इसी क्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता कुणाल ओझा ने नशे की बढ़ती लत और उससे उपजे अपराधों की गंभीरता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नशे के कारण समाज में सहनशक्ति घट रही है और आक्रोश बढ़ रहा है। ओझा ने मोबाइल की लत को भी एक अदृश्य नशा करार देते हुए उस पर नियंत्रण की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, जीवन में खेलों का समावेश युवाओं की दशा और दिशा दोनों को बदलने की शक्ति रखता है।

कार्यक्रम के अंत में कृतज्ञता स्वरूप सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सोसायटी के चेयरमैन मोहम्मद हनीफ रंगरेज ने सेमिनार के सभी वक्ताओं का माला, पगड़ी और मोमेंटो भेंट कर अभिनंदन किया। विशेष रूप से डॉ. फरियाद मोहम्मद को उनके निरंतर सेवा कार्यों और इस सफल आयोजन के लिए माला व पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर सचिव मोहम्मद एजाज शेख के साथ राजस्थान वक्फ बोर्ड के सदस्य शब्बीर अहमद शेख, मोहम्मद रफीक अंसारी, मोहम्मद असलम खान, मकसूद अली काजी, मुख्तार मीर, रमजान खान, नूर ईलाही पठान, अरविन्द मसीह, डॉ. फरजाना सिद्दीकी, माया मसीह, मोहम्मद सलीम गौड, मीरदाद खान, ताहिर हुसैन, खुशबु माली, दीपक जाट, खान मोहम्मद, इकबाल छीपा, अनवर अली, चांद मोहम्मद अंसारी, आसिफ, जावेद, अजहर, अकरम सहित कई गणमान्य नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यह सेमिनार न केवल एक चर्चा बनकर रह गया, बल्कि इसने भीलवाड़ा में नशे के विरुद्ध एक नई चेतना का संचार किया है, जिसका प्रभाव भविष्य में एक स्वस्थ और अपराध मुक्त समाज के रूप में देखने को मिलेगा।

Pratahkal Newsroom

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