सावर कस्बे के आश्रय स्थल में रह रहे ९० से अधिक निराश्रितों को युवाओं ने छप्पन भोग परोसा, सरकारी सहायता न मिलने के बावजूद तीन वर्षों से जारी है सेवा कार्य।

मानवता और निस्वार्थ सेवा की प्रतिमूर्ति, शाहपुरा के निकटवर्ती सावर कस्बे में संचालित 'सोशल मीडिया आश्रम' के संचालक राजभाई और उनके आश्रम में निवास कर रहे प्रभुओं (सेवाग्राहीजनों) का शाहपुरा में एक बेहद अनूठे और भव्य अंदाज में नागरिक अभिनंदन किया गया। क्षेत्र के प्रबुद्ध समाजसेवियों और ऊर्जावान युवाओं ने मिलकर उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया और एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस दौरान सावर आश्रम के सेवाग्राहियों का स्वागत किसी पारंपरिक बारात की तरह गाजे-बाजे के साथ किया गया, जिसने पूरे माहौल को आनंदोत्सव में बदल दिया। इस ऐतिहासिक समागम में सामूहिक भोजन के साथ-साथ सभी के लिए 'छप्पन भोग' की विशेष व्यवस्था की गई।

कार्यक्रम के मुख्य चरण में आश्रम के सभी प्रभुओं और समर्पित स्वयंसेवकों का माल्यार्पण कर भावभीना सम्मान किया गया। इस उल्लासपूर्ण अवसर पर स्थानीय युवाओं ने सेवाग्राहियों के साथ जमकर नृत्य किया और खुशियां साझा कीं। आयोजन का सबसे भावुक और मर्मस्पर्शी दृश्य तब उत्पन्न हुआ, जब स्वयंसेवकों और समाजसेवियों ने स्वयं अपने हाथों से सभी प्रभुओं को आदरपूर्वक भोजन परोसा और उनके साथ पंगत में बैठकर भोजन ग्रहण किया। कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय और प्रबुद्ध नागरिकों ने इस संपूर्ण आयोजन को जीवंत मानवता और सेवा का एक अद्भुत व अनुपम उदाहरण बताया।

संचालक राजभाई पिछले कई वर्षों से समाज के बेघर, मानसिक रूप से विक्षिप्त, लावारिस और असहाय लोगों की सेवा में पूरी निष्ठा से जुटे हुए हैं। अपने जीवन के संघर्षों को साझा करते हुए राजभाई ने बताया कि बचपन से ही उनके मन में दीन-दुखियों की सेवा करने का प्रगाढ़ भाव था। हालांकि, उनका परिवार चाहता था कि वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक अच्छी सरकारी या निजी नौकरी करें, परंतु उन्होंने अंतरात्मा की आवाज पर केवल जरूरतमंद लोगों की सेवा के अत्यंत कठिन मार्ग को चुना। शुरुआती दौर में उन्हें भारी आर्थिक तंगी, आवश्यक संसाधनों की घोर कमी और कई सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने इस पुनीत संकल्प को कभी कमजोर नहीं होने दिया।

अपने सेवा अभियान को स्थायी धरातल देने के लिए उन्होंने दो वर्ष पूर्व अपने परिवार की दो बीघा निजी जमीन पर एक व्यवस्थित आश्रय स्थल विकसित करने का भगीरथ कार्य शुरू किया था। आज उनके इस कड़े परिश्रम और समर्पण के परिणामस्वरूप वहां 90 से अधिक असहाय और निराश्रित लोग ससम्मान रह रहे हैं, जिनके दैनिक भोजन, चिकित्सा, आवास और संपूर्ण देखभाल की पूरी जिम्मेदारी आश्रम द्वारा उठाई जा रही है। इस पुनीत कार्य में करीब दस स्वयंसेवक दिन-रात निस्वार्थ भाव से उनकी सेवा और प्रबंधन में जुटे रहते हैं।

राजभाई ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आधुनिक दौर में सोशल मीडिया उनके इस पूरे मानवीय मिशन का सबसे बड़ा और सुदृढ़ आधार सिद्ध हुआ है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग से न केवल देश भर से जरूरतमंद लोगों की समय पर पहचान होती है, बल्कि आश्रम में आने वाले मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के बिछड़े हुए परिजनों को खोजने में भी अभूतपूर्व मदद मिलती है। इस सोशल मीडिया नेटवर्क के माध्यम से अब तक कई लावारिस लोगों को खोजकर उनके परिवारों से दोबारा मिलवाया जा चुका है, जो इस संस्था की एक बड़ी उपलब्धि है। वर्तमान में यह पूरी संस्था केवल जनसहयोग, लोक-कल्याणकारी भावनाओं और दानदाताओं की सहायता पर ही निर्भर है।

संस्था के वैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं को रेखांकित करते हुए राजभाई ने स्पष्ट किया कि चूंकि संस्था का पंजीयन हुए अभी पूरे तीन वर्ष की अवधि व्यतीत नहीं हुई है, इस तकनीकी कारण से सरकारी सहायता और अनुदान प्राप्त करने में कुछ प्रक्रियात्मक बाधाएं आ रही हैं। इसके बावजूद, बिना किसी सरकारी मदद के भी यह सेवा कार्य लगातार निर्बाध रूप से जारी है। आश्रम में सेवाग्राहियों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण वर्तमान में आर्थिक चुनौतियां और वित्तीय भार भी तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन समाज से मिल रहे निरंतर सहयोग, स्नेह और अटूट विश्वास के बल पर उनका हौसला और संकल्प अडिग बना हुआ है।

राजभाई का दृढ़तापूर्वक मानना है कि आश्रम में रहने वाले ये सभी असहाय लोग उनके लिए साक्षात ईश्वर यानी प्रभु के समान हैं और इन प्रभुओं की सेवा करना ही उनके जीवन की सबसे बड़ी पूजा और साधना है। उन्होंने समाज के प्रतिष्ठित भामाशाहों, उदार दानदाताओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से इस अत्यंत संवेदनशील मानवीय अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की भावुक अपील की, ताकि भविष्य में और भी अधिक संख्या में जरूरतमंदों को एक गरिमापूर्ण और सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जा सके। भीलवाड़ा के शाहपुरा में आयोजित मानवता और निस्वार्थ सेवा के इस अनूठे समागम ने संपूर्ण समाज में यह कड़ा संदेश प्रवाहित किया है कि समाज में आज भी ऐसे विरले लोग मौजूद हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों के अंधकारमय जीवन में खुशियां, प्रकाश और खोया हुआ सम्मान लौटाने का महान कार्य कर रहे हैं।

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