भीलवाड़ा: सिंधु नगर गुरुद्वारा साहिब में हर्षोल्लास के साथ मना बैसाखी पर्व
भीलवाड़ा के सिंधु नगर में खालसा सृजना दिवस पर विशेष कीर्तन दीवान और लंगर का आयोजन, लुधियाना के भाई मनप्रीत सिंह के जत्थे ने संगत को निहाल किया।

राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित सिंधु नगर के गुरुद्वारा साहिब में खालसा सृजना दिवस और बैसाखी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सचिव ऋषिपाल सिंह के अनुसार, इस पावन अवसर पर गुरुद्वारा साहिब को विशेष रूप से सजाया गया जहां सुबह से ही विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला आरंभ हुई। प्रातः 8 बजे विशेष कीर्तन दीवान सजाए गए, जिसमें ज्ञानी करनैल सिंह जी एवं सुखबीर सिंह जी के जत्थों ने सुमधुर गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से उपस्थित संगत को भक्ति रस में सराबोर कर निहाल किया।
’’खालसा अकाल पुरख की फौज, प्रगटयो खालसा परमातम की मौज’’ के जयघोष के बीच ज्ञानी जी ने खालसा पंथ के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज ही के दिन सन् 1699 में दशमेश पिता श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने पांच प्यारों को अमृतपान कराकर और तत्पश्चात स्वयं अमृत छक कर खालसा पंथ की स्थापना की थी। गुरु महाराज ने समाज से जातिगत ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर संगत में भक्ति और शक्ति का नया संचार किया। उन्होंने एक अकाल पुरख परमात्मा की आराधना पर बल देते हुए मजलूमों की रक्षा और निर्धन एवं असहायों की सेवा के लिए खालसा पंथ को एक विशिष्ट पहचान प्रदान की।
कार्यक्रम के मुख्य पड़ाव में प्रातः 10.30 बजे सामूहिक अरदास की गई, जिसके उपरान्त श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण हुआ। गुरप्रीत सिंह ने जानकारी दी कि शाम 4 बजे से ही लंगर सेवा का कार्य प्रारंभ कर दिया गया था, जिसमें महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर अपनी सेवाएं अर्पित कीं। गुरुद्वारा अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह सोनी ने बताया कि सायंकाल 7.30 बजे पुनः गुरबाणी कीर्तन का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें लुधियाना से आए भाई मनप्रीत सिंह जी के जत्थे ने अपनी कीर्तन शैली से संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। रात्रि 9.30 बजे सामूहिक अरदास के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसके पश्चात गुरु का लंगर अटूट वितरित किया गया। इस गौरवमयी आयोजन के अवसर पर प्रबंधक कमेटी के सदस्य इकबाल सिंह, दर्शन सिंह, जसमीत सिंह, नवजोत सिंह, मनिन्दर सिंह, मनप्रीत सिंह, गौरव नागपाल और श्रवण सिंह सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे, जिन्होंने समस्त मानवता को बैसाखी पर्व की लख-लख बधाइयां प्रेषित कीं।a

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