भीलवाड़ा। भक्ति की शक्ति और परंपराओं के अनूठे संगम ने मंगलवार शाम को भीलवाड़ा के स्थानीय नाथद्वारा सराय स्थित दादा हेमराजमल भगत झूलेलाल सनातन मंदिर में एक आध्यात्मिक उत्सव का सूत्रपात किया। सिंधी समाज द्वारा आयोजित पारंपरिक मांघ मास के मासिक चंद्र उत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रदर्शित किया, बल्कि एकता और हर्षोल्लास की एक ऐसी तस्वीर पेश की, जिसने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर कर दिया। गगनभेदी जयकारों, दिव्य भजनों की गूंज और पारंपरिक छेज नृत्य के बीच यह आयोजन आस्था के एक महाकुंभ में तब्दील हो गया।

इस आध्यात्मिक महोत्सव की गरिमा महंत टेऊंराम भगत के सानिध्य में और भी बढ़ गई। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान झूलेलाल की विधिवत आराधना और विशेष पंजड़ों के साथ हुई। सिंधी समाज के मीडिया प्रभारी मूलचंद बहरवानी ने आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार सिंधी समुदाय ने अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए इस पवित्र माह के चंद्र उत्सव को पूर्ण विधि-विधान के साथ संपन्न किया। मंदिर में पुष्पवर्षा और भक्ति संगीत का ऐसा समां बंधा कि उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।

भजनों की स्वर लहरियों ने वातावरण को दिव्य बना दिया, जहाँ श्रद्धालुओं ने “झूलेलाल मुहिंजो उडेरो लाल”, “गुरू त मुहिंजो झूलण आहे”, “असांजा अर्जु सभई अगाइंदों३ सुठी राह हलाइंदो पार पहुॅचाइंदो” और “रख त मुहिंजे लालण ते-पाण ही पूरी कंदो” जैसे पारंपरिक सिंधी भजनों के माध्यम से अपने आराध्य का आह्वान किया। इन भजनों की लय पर भक्तों ने उत्साहपूर्वक पारंपरिक 'छेज नृत्य' प्रस्तुत किया, जो सिंधी संस्कृति की जीवंतता का प्रतीक माना जाता है। भक्ति की इस धारा में डूबे सैकड़ों श्रद्धालुओं के "लाल झूलेलाल-झूलेलाल" के उद्घोष ने मंदिर के कोने-कोने को गुंजायमान कर दिया।

धार्मिक अनुष्ठानों के इस क्रम में अंत में सभी समाजजनों और सेवाधारियों ने सामूहिक आरती में भाग लिया और 'पल्लव अरदास' के माध्यम से राष्ट्र की खुशहाली, विश्व शांति और सिंधी समाज की निरंतर समृद्धि की प्रार्थना की। उत्सव का समापन दिव्य 'हथ-प्रसादी' के वितरण के साथ हुआ, जिसमें ताहिंरी-कुहर, रां-हलवा, अनार, कीनू, केला और विविध प्रकार के फलों का भोग भक्तों में वितरित किया गया।

इस ऐतिहासिक उत्सव की सफलता में समाज के प्रबुद्ध जनों और सेवाभावी सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन के दौरान दादा हेमराजमल साहब सेवा समिति के संस्थाध्यक्ष गुलशनकुमार विधानी के साथ रामचंद्र खोतानी, भगवंती भगत, महेश खोतानी, हरीशकुमार सखरानी, कालू भगत, चीजन फतनानी, सीमा भगत, ताराचंद ओड़वानी, अशोक केवलानी, आसुदा भगत, कमल वैशनानी, धर्मू गुरनानी, हेमंत भगत, दिव्या भगत, नानकराम जेठानी, हार्दिक विधानी, कोमल चावला, रूकी दादी, नवीन भगत, सतीश मोनानी और हेमंत धनवानी सहित सैकड़ों श्रद्धालु अपनी अटूट आस्था के साथ साक्षी बने। यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन मात्र नहीं था, बल्कि यह भीलवाड़ा के सामाजिक ताने-बाने में सिंधी संस्कृति और उसकी अटूट परंपराओं के प्रति गहरी निष्ठा का प्रमाण बनकर उभरा।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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