भीलवाड़ा, 2 फरवरी। पवित्र भावों के साथ जो भागवत की गंगा में डूबकी लगा ले उसका जीवन सफल हो जाता है। श्रीमद भागवत को जन्म मरण के बंधन को समाप्त कर इस लोक के साथ परलोक को भी सुधारने वाली है। मनुष्य ही है जो भागवत कथा जैसा आयोजन कर सकता है।

शहर के रोडवेज बस स्टेण्ड के पास अग्रवाल उत्सव भवन में सोमवार को स्व. श्रीमती गीतादेवी तोषनीवाल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महोत्सव का आगाज हुआ। इस अवसर पर पहले दिन व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए रामद्वारा चित्तौड़गढ़ के रामस्नेही संत ओजस्वी प्रखर वक्ता श्री दिग्विजय रामजी महाराज ने यह विचार व्यक्त किए।


संत दिग्विजयरामजी महाराज के आशीर्वचन

  • "श्रीमद् भागवत कथा सुनने से जीवन धन्य हो जाता है एवं यह परमात्मा की प्राप्ति का माध्यम है।"
  • "भागवत वक्ता वैरागी एवं श्रोता प्रभु अनुरागी हो तभी भक्ति सरिता प्रवाहित होने का आंनद मिल सकता है।"
  • "वह सौभाग्यशाली होते है जिन्हें भागवत कथा श्रवण का सुअवसर मिलता है। भागवत मनोरंजन का नहीं मन भंजन का विषय है जिसे श्रवण करने से हरि हमारे अंदर प्रवेश कर जाते है।"
  • "भगवान की कृपा के बिना उनके नाम का उच्चारण भी नहीं कर सकते है। कर्म आड़े आने पर कथा श्रवण नहीं कर पाते।"
  • "भागवत रूपी साबुन हमारे अंतकरण को स्वच्छ कर मन की मलिनता को दूर करता है। सच्चिदानंद रूपी भगवान से रिश्ता जोड़ने के लिए उसके स्वरूप को पहचानना होगा।"
  • "जो माताएं मस्तक पर कलश को धारण करती है भगवान चारभुजानाथ उसके जीवन के सारे क्लेश मिटा देते है।"
  • "संत सुलाने नहीं बल्कि जागृत कराने आते है। तन से पांडाल में आ गए पर मन से नहीं आए तो कथा लाभ नहीं देेगी।"
  • "सत्य का कभी अभाव नहीं होता ओर असत्य का कभी प्रभाव नहीं होता। सत्संग से बड़ा जीवन में आनंद प्रदाता कोई नहीं है।"
  • "दुनिया का वैभव मजा दे सकता पर आनंद सत्संग से ही मिलेगा। हमारा जीवन बातों ओर नींद में ही निकल रहा है।"
  • "जीव के दो शत्रु नींद ओर निंदा है जिन पर विजय पाने से ही प्रभु भक्ति ओर मोक्ष प्राप्ति संभव है।"

भव्य कलश यात्रा एवं कार्यक्रम का विवरण

धर्मनगरी भीलवाड़ा में महोत्सव का आगाज सोमवार सुबह भव्य कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। यह यात्रा माणिक्यनगर स्थित हंसमुख बालाजी मंदिरी से शुरू होकर विभिन्न मार्गो से होते हुए कथास्थल अग्रवाल उत्सव भवन तक पहुंची।

  • शोभायात्रा का स्वरूप: कथावाचक संत दिग्विजयरामजी महाराज के सानिध्य में सबसे आगे रथ पर भगवान चारभुजानाथ एवं स्वामी रामचरणजी महाराज के विग्रह विराजमान थे।
  • सहभागिता: चुनरी पहने हुए सैकड़ो महिलाएं सिर पर कलश धारण करके चल रही थी। कई महिला नृत्य करते हुए साथ चल रही थी। भक्तों ने सिर पर साफे बांध रखे थे।
  • पोथी पूजन: श्रीमद् भागवत कथा की पौथी आयोजक तोषनीवाल परिवार के रामस्वरूप तोषनीवाल, दीपक तोषनीवाल, शुभम तोषनीवाल आदि सदस्य बारी-बारी से अपने सिर पर धारण करते हुए चले।
  • वातावरण: बैण्ड पर गूंज रही भक्तिपूर्ण स्वरलहरियां माहौल को धर्ममय बना रही थी। समाज के विभिन्न वर्गो के सैकड़ो भक्तगण उत्साह के साथ शामिल हुए।

प्रथम दिन के अनुष्ठान एवं पूजन

कथा प्रारंभ होने से पूर्व सुबह भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई। पहले दिन श्रीमद् भागवत की स्थापना के साथ श्रीमद् भागवत महात्म्य मंगलाचरण का वाचन हुआ।

  • स्वागत एवं आरती: आयोजक तोषनीवाल परिवार की ओर से संत दिग्विजयरामजी का आत्मिक स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मुख्य श्रोता के रूप में विराजित ठाकुर चारभुजानाथ की पूजा अर्चना करते हुए व्यास पीठ की पूजा की गई। प्रथम दिन की कथा विश्राम पर व्यास पीठ की आरती तोषनीवाल परिवार के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने की।
  • संचालन: मंच संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया।

भक्ति सरोवर में डूबे श्रद्धालु

कथा के दौरान भक्तिमय भजनों से समुचा कथा पांडाल भक्ति सरोवर में हिलोरे लेता रहा। जिसको जीवन में मिला सत्संग है उसे हर घड़ी आनंद ही आनंद है, श्रीमद् नारायण नारायण हरी हरी, भज गोविन्दम, गढ़बोर बिराजा चारभुजा जैसे भजनों पर बुर्जुगों से लेकर महिला श्रद्धालु तक भक्तिभाव से झूमते रहे। भजन प्रारंभ होते ही श्रद्धालु मंच के समक्ष आकर नृत्य कर आंनद के सागर मेें डूबकी लगाते रहे।


पंच कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ

परिसर में सोमवार से सात दिवसीय महामंगलकारी पंच कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ भी प्रारंभ हो गया। यह प्रतिदिन सुबह 8 से दोपहर 12.30 बजे तक ज्ञायिक रत्न आचार्य पंडित गौरीशंकर शास्त्री एवं वैदिक विद्धानों के तत्वावधान में होगा।

  • प्रथम दिन के यजमान: दीपक तोषनीवाल एवं तपन झंवर ने प्रधान कुंड में आहुति दी।
  • अन्य कुंड यजमान: संजय लड्ढ़ा, निलेश ईनाणी, सुनील मूंदड़ा, शुभम तोषनीवाल ने सजोड़ा आहुति दी।
  • उद्देश्य: इस यज्ञ में प्रतिदिन अलग-अलग जजमान शामिल होकर सर्व मंगल एवं सुख शांति की कामना से आहुति देंगे।

आगामी कार्यक्रम की सूचना

श्रीमद् भागवत कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर दो से शाम 6 बजे तक होगा।

  • मंगलवार (दूसरा दिन): कपिल देवहुति संवाद, सती चरित्र व धु्रव चरित्र प्रसंग का वाचन होगा।
  • विशेष आयोजन: 5 फरवरी की रात 8 बजे से कथा स्थल पर भव्य नंद महोत्सव का आयोजन होगा।
Pratahkal Newsroom

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