भीलवाड़ा, 7 फरवरी 2026: राम स्नेही सम्प्रदाय के संत दिग्विजयराम ने कहा कि जीवन में भक्ति भाव को अंगीकार करना हो तो गोपी भाव को प्रधानता दे तभी ईश्वर प्राप्ति संभव हैं। संत दिग्विजयराम शनिवार को धर्म नगरी भीलवाड़ा में तोषनिवाल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के षष्ठम दिवस को व्यासपीठ से भागवत कथा अमृतपान करवा रहे थे। उन्होंने कहा:

"जीवन में यदि अहंकार है तो भक्ति तत्व को अंगीकार नहीं किया जा सकता"

शरद पूर्णिमा महारास और वेणुगीत प्रसंग

  • उन्होंने शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि को हुए महारास में गौकुल वृन्दावन की समस्त गोपियों एवं देवताओं के साथ वेणुगीत के बीच महारास की चर्चा की।
  • वेणुवादन के बाद आई गोपियों को श्री कृष्ण ने जब घर जाने की कहा तो उनका उत्तर था कि अब उनके चरण ही घर की ओर नहीं जा सकते तो वे कहा से जाएंगी।
  • इसी बीच राधा रानी भी महारास में भागीदार बनी। जिसका वर्णन इतना सुंदर था कि महारास मंडप में 9 लाख गोपियों के साथ 9 लाख कृष्ण भी रास करने लगे।

तभी युवा संत ने निराले अंदाज में "राधा नाचे कृष्ण नाचे नाचे गोपीजन" भजन की प्रस्तुति दी तो कथा मंडप भी महारास मंडप में निरूपित हो गया।


असुर वध और मथुरा प्रस्थान

कथा के दौरान सुदर्शन और शंख चूड़ का श्री कृष्ण द्वारा उद्धार किया गया। वहीं कंस के द्वारा भेजे गए कई असुरों को भी मौत के घाट उतार दिया। कथा व्यास ने बताया कि देव ऋषि श्री नारद ने कंस के दरबार में पहुंचकर बताया कि तुम्हें मारने वाले कृष्ण और बलराम गोकुल में मौजूद हैं, जिन्हें अक्रुर जी को भेज कर मथुरा बुलाए।

तब अक्रुर जी ने गोकुल जाकर कृष्ण को कंस वध के बारे में संपूर्ण जानकारी दी और वहां से सूर्योदय से पूर्व मध्यरात्रि में ही गोकुल को 11 वर्ष व 12 दिन बाद छोड़कर मोह सागर त्यागते हुए मथुरा के लिए प्रस्थान कर दिया।


मथुरा विजय और कंस वध

  • मथुरा पहुंचने पर कृष्ण ने धोबी का उद्धार किया।
  • दर्जी और सुदामा माली जो पूर्व जन्म में सग्रीव थे, उन्होंने कान्हा का स्वागत किया।
  • कन्हैया ने कुबजा की वक्रता को दूर किया।
  • कुबलिया पिण्ड पागल हाथी द्वारा कन्हैया पर हमला करने पर एक मुस्ठिका से उसका वध कर मल के मैदान में प्रवेश किया।
  • वहां चाणुर व मुस्ठिक मारे गए और कृष्ण ने कंस का भी वध कर दिया।

तत्पश्चात श्री कृष्ण ने कारागार से देवकी वसुदेव को मुक्त कराया, जहां से उन्हें संदीपनी आश्रम में ज्ञानार्जन के लिए भेजा गया। जहां उनकी सुदामा से मित्रता हो गई और संदीपनी ऋषि को गुरू दीक्षा के रूप में गुरूमाता का पुत्र, जो प्रभाश क्षेत्र में मारा गया था, उसको जीवन प्रदान किया। शिक्षा प्राप्ति के बाद भगवान मथुरा के अधिपति बन गए।


उद्धव का गर्व भंग और गोकुल संदेश

श्री कृष्ण ने उद्धव के ज्ञान के अहंकार को विदिर्ण करने के लिए उन्हें अपना संदेश देकर गोकुल भेजा। वहां पहुंचकर उद्धव जी ने जब नन्द बाबा का ग्रह पूछा तो गोकुल वासियों ने कहा कि अश्रुओं की धार से बह रहे नाले के साथ जाने पर उनके ग्रह पहुंच जाएंगे।

भ्रमर गीत के माध्यम से गोपियों ने अपने आराध्य के प्रति भाव प्रकट किए। जब उद्धव ने उन्हें लाख समझाने की कोशिश की तो गोपियों ने कहा कि "उधो मन नाही दस बीस" बताया। इससे उद्धव के ज्ञान का अहंकार खत्म हो गया और वे छह माह तक गोकुल में रहे। वहां से मथुरा जाने पर श्री कृष्ण ने उन्हें कहा कि उनका मन तो आज भी गोकुल में ही हैं।


रुक्मणी विवाह और सामाजिक सरोकार

संत ने कहा कि भगवान मथुरा से द्वारिका पधार गए, जो मोक्ष दायिनी सप्तपुरियों में से एक हैं। जरासंध से युद्ध के बीच मैदान छोड़कर जाने पर श्री कृष्ण रणछौर कहलाएं। जब द्वारिकाधीश ग्यारस वर्ष गोकुल और चौदह वर्ष मथुरा रहने के बाद पच्चीस वर्ष के हुए तो विवाह की तैयारियां होने लगी।

  • विदर्भ राज की कन्या रुकमणी का विवाह शिशुपाल से करना तय हो गया था, लेकिन रुकमणी तो मन ही मन श्री कृष्ण को वर चुकी थी।
  • उन्होंने संदेश वाहक के साथ अपने भाव प्रकट किए, तो द्वारकाधीश भी रुकमणी विवाह करने के लिए निकल पड़े।
  • शिशुपाल की 100 गलतियों के बाद उसका वध कर रुकमणी का अपहरण कर द्वारिका ले गए, जहां ठाठ बाठ से कृष्ण रुकमणी का विवाह हुआ।

युवा संत ने "बन्नो मारो द्वारिका नाथ बन्नी तो मारी रूकमण लाड़ली" भजन की प्रस्तुति दी तो समूचा वातावरण द्वारका का विवाह मंडप बन गया। कथा मंडप में भगवान श्री कृष्ण के बारात की झांकी व रुकमणी के विवाह का दृश्य हजारों दर्शकों के लिए आनंदित करने वाला हो गया।

आज रुक्मणी विवाह के बाद जोली फेला कर राशि एकत्रित की गई। प्राप्त ₹ राशि को घोषणा अनुसार केशव आदर्श घुमक्कड़ बेसहारा परिवार के बच्चों की सहायता हेतु चलाये जा रहे आवासीय विद्यालय भीलवाड़ा के अध्यक्ष जी को सहायतार्थ दी। तोषनिवाल परिवार एवं उनके मित्रों द्वारा व्यासपीठ की पूजा अर्चना कर आरती की।

Pratahkal Newsroom

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