भीलवाड़ा, 3 जून। भीलवाड़ा में पूरणमल-सम्पत देवी रांदड़ परिवार के तत्वावधान में महेश वाटिका में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के द्वितीय दिवस का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ। कथा व्यास श्रद्धेय कृपाराम जी महाराज (जोधपुर) ने श्रीमद्भागवत के प्रेरणादायी प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग प्रशस्त करने का संदेश दिया।

कथावाचन के दौरान महाराज श्री ने सुखदेव जन्म कथा, भीष्म स्तुति तथा राजा परीक्षित को प्राप्त श्राप के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीमद्भागवत मात्र एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, अपितु जीवन को सत्य, भक्ति और वैराग्य की ओर प्रेरित करने वाला दिव्य ज्ञान है। भगवान की भक्ति और संतों का सानिध्य ही मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाकर उसे आत्मिक शांति प्रदान करता है। महाराज श्री ने ज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यद्यपि धन, आयु, बल और बुद्धि से व्यक्ति श्रेष्ठ हो सकता है, परंतु इन सभी में ज्ञानवान व्यक्ति ही सर्वोपरि है। ज्ञान ही मनुष्य को सही दिशा प्रदान कर उसके जीवन के वास्तविक उद्देश्य तक पहुँचाता है।


महाराज श्री ने बताया कि ऋषि-मुनियों ने सूतजी महाराज से मानव कल्याण से जुड़े पाँच महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे थे, जिनमें मनुष्य के कल्याण का सरल साधन, शास्त्रों का सार, भगवान के अवतार लेने के कारण, भगवान के अवतारों की संख्या तथा मानव जीवन का परम लक्ष्य शामिल था। इन सभी प्रश्नों का समाधान श्रीमद्भागवत में निहित है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण लगभग 125 वर्ष तक पृथ्वी पर रहे और जब तक वे धरा पर रहे, धर्म उनकी शरण में रहा। उनके धाम गमन के पश्चात धर्म ने श्रीमद्भागवत का आश्रय ग्रहण किया, इसीलिए कलियुग में श्रीमद्भागवत का श्रवण धर्म, भक्ति और मोक्ष का सर्वोत्तम साधन माना गया है।

भीष्म पितामह की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति ही व्यक्ति को परमात्मा के निकट ले जाती है। परीक्षित श्राप प्रसंग के माध्यम से उन्होंने जीवन में संयम, विनम्रता और सत्संग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु की कृपा ही सबसे बड़ी संपदा है। कथा के दौरान कन्हैया के भजनों की संगीतमय प्रस्तुतियों ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया, जिस पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। आयोजन समिति के रोहित रांदड़ एवं रमेश सोनी ने जानकारी दी कि यह श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव 8 जून तक प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें नित्य नए धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।

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