भीलवाड़ा: महेश वाटिका में श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस भक्तिमय, गूंजे जयकारे
भीलवाड़ा की महेश वाटिका में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया गया, जिसमें श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

भीलवाड़ा की महेश वाटिका में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर व्यासपीठ पर विराजमान कृपारामजी महाराज और उपस्थित श्रद्धालु।
भीलवाड़ा, 5 जून। शहर की महेश वाटिका में पूरणमल-सम्पत देवी रांदड़ परिवार के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का चतुर्थ दिवस अत्यंत भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण रहा। कथा व्यास श्रद्धेय कृपारामजी महाराज (जोधपुर) के मुखारविंद से प्रवाहित ज्ञान गंगा के बीच जब भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग आया, तो संपूर्ण पांडाल "जय श्रीकृष्ण" और "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। जन्म प्रसंग के उल्लास में श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और भक्ति के इस अद्भुत वातावरण को जीवंत कर दिया।
कथा के चतुर्थ दिवस का शुभारंभ हनुमान चालीसा एवं संगीतमय भजन-कीर्तन के साथ हुआ। व्यासपीठ से संबोधित करते हुए कृपारामजी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक विद्यालय है, जो जीवन को सार्थकता की दिशा प्रदान करता है। उन्होंने नौ प्रकार की भक्ति—श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य एवं आत्मनिवेदन की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि इनमें से किसी एक का भी सच्चा अनुसरण मनुष्य को प्रभु की कृपा का पात्र बना सकता है।
महाराज श्री ने भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप के प्रसंग के माध्यम से विपरीत परिस्थितियों में भी अविचल विश्वास का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि प्रभु अपने भक्तों की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। कथा के दौरान ऋषभदेव अवतार के माध्यम से वैराग्य एवं तप, जड़ भरत के प्रसंग से मोह-माया से मुक्ति और अजामिल उद्धार की कथा से भगवान के नाम के प्रभाव को रेखांकित किया गया। गजेन्द्र मोक्ष और वामन अवतार की लीलाओं के साथ-साथ भगवान श्रीराम के त्याग और धर्मपरायण जीवन का वर्णन कर श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया गया।
आयोजन समिति के जगदीश सोनी एवं रोहित रांदड़ ने बताया कि यह भव्य महोत्सव 8 जून तक प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक महेश वाटिका में निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से इस पुण्यमयी कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ अर्जित करने की अपील की है। श्रीमद्भागवत कथा के रूप में प्रवाहित यह ज्ञान की धारा मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

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