भीलवाड़ा में श्रीमद् भागवत कथा: गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग का आयोजन
रामस्नेही संत दिग्विजय रामजी महाराज ने श्रीकृष्ण बाल लीला और इंद्र मान मर्दन प्रसंग का वाचन किया; श्रद्धालुओं ने छप्पन भोग की झांकी के दर्शन किए।

भीलवाड़ा के अग्रवाल उत्सव भवन में आयोजित भागवत कथा के पांचवें दिन गोवर्धन पूजा के अवसर पर भगवान की आकर्षक झांकी सजाई गई।
भीलवाड़ा, 6 फरवरी। जीवन में जैसी हमारी दृष्टि होगी वैसी ही सृष्टि नजर आएगी। यदि हमारी दृष्टि अच्छी हुई तो सब कुछ अच्छा नजर आएगा ओर दृष्टि बुराई वाली हुई तो हर चीज बुरी नजर आएगी। अच्छे को सब अच्छा ओर बुरे को सब बुरा ही दिखता है। जिसकी जैसी भावना होती है भगवान उसको वैसा ही फल प्रदान करते है। पूतना कन्हैया के प्राण हरना चाहती थी तो भगवान ने उसके प्राणों का पान कर लिया। दृष्टि अच्छी होने पर जीवन अच्छा हो जाता है।
ये विचार शहर के रोडवेज बस स्टेण्ड के पास अग्रवाल उत्सव भवन में स्व. श्रीमती गीतादेवी तोषनीवाल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के पांचवें दिन शुक्रवार को रामद्वारा चित्तौड़गढ़ के रामस्नेही संत ओजस्वी प्रखर वक्ता श्री दिग्विजय रामजी महाराज ने व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए व्यक्त किए।
कान्हा की बाल लीलाओं ने मोहा मन, गूंजे गिरिराज धरण के जयकारे
पांचवे दिन श्रीकृष्ण बाल लीला एवं गोवर्धन पूजा प्रसंग का वाचन किया गया एवं छप्पन भोग की आकर्षक झांकी सजाई गई। कथा के मुख्य अंश निम्नलिखित रहे:
- "भजन ओर भोजन दोनों जरूरी है क्योंकि भजन से आत्मा का ओर भोजन से शरीर का पोषण होता है।"
- जीवन में भजन करने, सेवा करने एवं पुण्य करने में तनिक भी विलंब नहीं करना चाहिए।
- जिनको एक बार प्रभु का आश्रय मिल जाता है फिर माया भी उसकी दासी बनकर घूमती है।
- "भजन मत कर काया का अभिमान" के माध्यम से प्रेरणादायी संदेश दिया कि जीवन में कभी काया ओर माया का अभिमान नहीं करना चाहिए क्योंकि दोनों का कोई भरोसा नहीं कब साथ छोड़ जाए।
गोवर्धन पूजा एवं इंद्र का मान मर्दन
महाराजश्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वाचन किया:
- नंद और यशोदा ने कन्हैया की बाल लीलाओं का आनंद किस तरह प्राप्त किया इसकी चर्चा की।
- भगवान कृष्ण ने गिरिराज गोवर्धन महाराज की पूजा करने की प्रेरणा प्रदान करके देवराज इन्द्र के अभिमान को नष्ट किया।
- इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अंगुली पर उठाने के कारण भगवान को गिरिराज धरण का नाम भी दिया गया।
- इस प्रसंग के दौरान पांडाल गिरिराज धरण के जयकारों से गूंज उठा तथा गिरिराज धरण की सजीव झांकी सजाई गई।
- भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए भगवान शंकर के जोगी का रूप लेकर यशोदा के घर आने के प्रसंग की भी चर्चा हुई।
आरती एवं व्यवस्था संचालन
श्री गणेश उत्सव प्रबंध एवं सेवा समिति के अध्यक्ष उदयलाल समदानी ने भी व्यास पीठ पर विराजित संत दिग्विजयरामजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। पांचवें दिन की कथा विश्राम पर व्यास पीठ की आरती तोषनीवाल परिवार के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने की। कथा के शुरू में श्रद्धालुओं द्वारा भागवतजी की आरती की गई। मंच संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया।
कृष्ण भक्ति की रसधारा में डूबकर झूमते रहे श्रद्धालु
श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में पांचवें दिन भी श्रद्धालु संगीतमय भक्तिरस में डूबे रहे। इन प्रमुख भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमते रहे:
- आजा म्हारा कानोडा कई वेजो
- ओ मैया तेरे द्वारे बाला जोगी आयो
- द्वारिका को नाथ म्हारा राजा रणछोड़जी
- झूलनी पर सेठ सावरो झुलवा ने जावे सा
- गुर्जर को पकड्यो हाथ छुड़ाए दीनानाथ
- श्रीनाथजी को छप्पन भोग के अवसर पर: "म्हारे लाडीला श्रीनाथजी ने खम्मा रे खम्मा"
आगामी कार्यक्रम: सुंदरकांड एवं कथा विश्राम
- राष्ट्रीय संत डॉ. मिथिलेश नागर कल करेंगे संगीतमय सुंदरकांड: 7 फरवरी शनिवार को शाम 7 बजे से नैनौराधाम के डॉ. मिथिलेश नागर के मुखारबिंद से संगीतमय सुंदरकांड पाठ का भव्य आयोजन होगा।
- छठा दिन (शनिवार): उद्धव चरित्र एवं रूक्मणी विवाह प्रसंग का वाचन।
- समापन दिवस (रविवार): कथा पूर्णाहुति से पूर्व सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वाचन होगा।

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