भीलवाड़ा: श्रीमद् भागवत कथा में संत बोले- राम से बड़ा राम का नाम
भीलवाड़ा में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन संत दिग्विजयरामजी ने कुव्यसन त्यागने और सनातन एकता के साथ संस्कारों का महत्व बताया।

भीलवाड़ा के अग्रवाल उत्सव भवन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए चित्तौड़गढ़ के रामस्नेही संत दिग्विजयरामजी महाराज।
भीलवाड़ा, 4 फरवरी। कलयुग में प्रभु नाम का सुमिरन करने मात्र से सारे पाप, ताप, संताप मिट जाते है ओर सर्व सुखों की प्राप्ति होती है। राम से बड़ा राम का नाम है जिसकी महिमा अपरम्पार है। हरि नाम लेने के लिए समय का इन्तजार नहीं करे क्योंकि व्यक्ति ये तो जानता है कि उसकी दौलत कितनी है लेकिन ये नहीं पता कि उसके पास समय कितना है। जीवन में एक क्षण का भरोसा नहीं है ओर जिंदगी के अंतिम पलों में न माया ओर न काया काम आती है।
कलयुग में प्रभु भक्ति का महत्व
"जीवन में खुशहाल ओर संतोषी बनना है तो ईश्वर ओर मौत को हमेशा याद रखे ओर उपकार ओर अपमान को भूल जाए।" ये विचार शहर के रोडवेज बस स्टेण्ड के पास अग्रवाल उत्सव भवन में बुधवार को स्व. श्रीमती गीतादेवी तोषनीवाल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के तीसरे दिन व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए रामद्वारा चित्तौड़गढ़ के रामस्नेही संत ओजस्वी प्रखर वक्ता श्री दिग्विजय रामजी महाराज ने व्यक्त किए।
संत दिग्विजयरामजी महाराज ने कहा कि कलयुग को क्लेश का युग भी कह सकते है जिसमें भागवत कथा शांति का अनुभव कराती है। "जीवन में जो अपना नहीं उस पर भी हक जमाए तो महाभारत की शुरूआत होती है। दूसरों की संपति पर हक जमाने की बजाय जो अपना है उसका भी त्याग करने का मन हो जाए तो समझ लेना जीवन में संतोष प्रदान करने वाले भागवत तत्व का प्रवेश हो गया है।" उन्होंने कहा कि ये कलयुग का ही प्रभाव है कि माता पिता की संपति पर अधिकार बता उस पाने के लिए केस करते है पर उनकी सेवा का अधिकार पाने के लिए कोई आगे नहीं आता।
कुव्यसन त्याग एवं संस्कारों की प्रेरणा
- संतश्री ने मदिरापान जैसे कुव्यसन त्याग की प्रेरणा देते हुए कहा कि नशा परिवार को बर्बाद कर देता है।
- "नशा करना ही है तो प्रभु भक्ति का करो अपेय का पान करने से जीवन का पतन होता है।"
- छल कपट ओर अनीति से कमाई जाने वाली संपति कुछ वर्ष भले टिक जाए पर अंत में समूल नाश का कारण बन जाती है।
- उन्होंने ध्रुव प्रसंग वाचन के दौरान कहा कि मां से मिले संस्कार व ज्ञान जीवन का आधार होता है।
तृतीय दिवस के मुख्य प्रसंग एवं झांकी
तीसरे दिन धु्रव चरित्र, जड़भरत संवाद, प्रहलाद चरित्र प्रसंग का वाचन किया गया। कथा के दौरान भक्त धु्रव ओर भगवान नारायण की सजीव झांकी भी आकर्षण का केन्द्र रही।
सनातन एकता का संदेश: 'जाति पाति की करो विदाई हम सब हिंदू भाई-भाई'
कथा में संत दिग्विजयरामजी ने सनातन एकता का संदेश देते हुए कहा कि "जाति पाति की करो विदाई हम सब हिन्दू भाई-भाई। हम घटेंगे या बटेंगे तो कटना पड़ेगा। सभी सनातनी गर्व से कहें कि हम हिन्दू है।" अपने बच्चों को भी अपने धर्म ओर संस्कृति से जोड़ना होगा। हिन्दू सम्मेलन सनातनियों को जोड़ने ओर एकजुट करने का प्रयास है।
संतों का सानिध्य एवं आयोजन विवरण
श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को कई संत दर्शन का भी सौभाग्य मिला। मंच पर निम्नलिखित संतों का सानिध्य प्राप्त हुआ:
- भीलवाड़ा के हरिशेवा उदासीन आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन
- संकटमोचन हनुमान मंदिर के महन्त बाबूगिरीजी महाराज
- आलोटा से रामस्नेही संत मनोरथरामजी महाराज
संतों ने व्यास पीठ पर विराजित संत दिग्विजयरामजी महाराज का अभिनंदन किया तो उन्होंने भी कथा में पधारे संतों का स्वागत किया। तोषनीवाल परिवार की ओर से भी संतों का अभिनंदन किया गया। तीसरे दिन की कथा विश्राम पर व्यास पीठ की आरती तोषनीवाल परिवार के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने की। कथा के शुरू में श्रद्धालुओं द्वारा भागवतजी की आरती की गई। मंच संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया।
पंच कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ
श्रीमद भागवत कथा महोत्सव परिसर में सात दिवसीय महामंगलकारी पंच कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ सुबह 8 से दोपहर 12.30 बजे तक ज्ञायिक रत्न आचार्य पंडित गौरीशंकर शास्त्री एवं वैदिक विद्धानों के तत्वावधान में जारी है। इस यज्ञ में प्रतिदिन अलग-अलग जजमान शामिल होकर सर्व मंगल एवं सुख शांति की कामना से आहुति दे रहे है।
आगामी कार्यक्रम: नंदोत्सव और रासलीला
श्रीमद् भागवत कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर दो से शाम 6 बजे तक हो रहा है। कथा में चौथे दिन गुरूवार को श्री कृष्ण जन्म नंदोत्सव प्रसंग का वाचन होगा। आयोजन के तहत गुरूवार रात 8 बजे से कथा स्थल पर भव्य नंद महोत्सव का आयोजन होगा, जिसके माध्यम से रासलीला की भव्य प्रस्तुति होगी।
भजनों की रसधारा में झूमे श्रद्धालु
भागवत कथा के दौरान भजनों की रसधारा पांडाल में प्रवाहित होती रही। संत दिग्विजयरामजी ने कथा के अंत में जैसे ही भगवान चारभुजानाथ की महिमा दर्शाने वाले भजन की प्रस्तुति दी तो सैकड़ो श्रद्धालु अपनी जगह छोड़ मंच के समक्ष आकर भक्ति की गंगा में डूबकर झूमने लगे। कथा के दौरान इन भजनों ने श्रद्धालुओं को सरोबोर किया:
- 'जगन्नाथ हमे तू न संभाले तो कौन संभाले'
- 'कंचन वाणी काया रे सैलानी बीरा पावणा'
- 'श्रीमद नारायण शंकर नारायण शंभू नारायण'
- 'माता अनुसूईया ने डाल दिया पालना झूल रहे तीन देव बनकर लालना'
- 'ओम नमो भगवतो वासुदेवाय'

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