श्री चारभुजा मंदिर पाटोत्सव: आचार्य शक्ति देव जी के मुखारविंद से गूँजी महाभारत और परीक्षित जन्म की गाथा
भीलवाड़ा के श्री चारभुजा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन महाभारत के प्रसंग और महाराज परीक्षित के अलौकिक जन्म की गाथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। जानिए आचार्य शक्ति देव जी ने धर्म पर क्या अनमोल सीख दी।

भीलवाड़ा के श्री चारभुजा मंदिर में आयोजित भागवत कथा के दौरान आचार्य शक्ति देव जी महाराज उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति का संदेश दे रहे हैं।
भीलवाड़ा, 14 जून। संजय कॉलोनी स्थित श्री चारभुजा मंदिर में आयोजित 26वें पाटोत्सव महोत्सव के पावन अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ। इस दिव्य अनुष्ठान में कथा व्यास आचार्य श्री शक्ति देव जी महाराज ने महाभारत काल की गौरवगाथा और महाराज परीक्षित के जन्म प्रसंग का अत्यंत ओजस्वी और भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म के मर्म से परिचित कराया।
कथा का शुभारंभ करते हुए आचार्य श्री ने प्रतिपादित किया कि श्रीमद्भागवत महापुराण मानव मात्र को ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने धर्म की विशद व्याख्या करते हुए कहा कि 'धर्म' वही है जिसे धारण किया जाए; देश, काल और परिस्थिति के अनुरूप इसकी व्याख्या बदल सकती है, किंतु निष्काम कर्म ही ईश्वर प्राप्ति का एकमात्र सुलभ साधन है। महाभारत के प्रसंगों का सजीव चित्रण करते हुए उन्होंने पांडवों के आदर्शों, द्रौपदी की क्षमाशीलता और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से धर्म, दया और करुणा का संदेश दिया।
कथा के दौरान आचार्य श्री ने परीक्षित जन्म के मार्मिक प्रसंग का वर्णन किया, जिसमें अश्वत्थामा द्वारा उत्तरा के गर्भ पर किए गए ब्रह्मास्त्र के प्रहार और भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बालक परीक्षित की रक्षा करने की घटना ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भजनों की प्रस्तुति के साथ भक्तिरस से सराबोर हुए श्रद्धालुओं ने जीवन के संकटों में ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का संकल्प लिया। आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि कलियुग के दुष्प्रभावों से बचने का एकमात्र उपाय सत्संग और सेवा का मार्ग अपनाना है।
कार्यक्रम के अंत में महाराज परीक्षित की आकर्षक झांकी सजाई गई, जहाँ महिला मंडल की सदस्यों ने पुष्प अर्पण कर वंदना की। महाआरती के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया। समिति के अध्यक्ष जगदीश देवपुरा और मंत्री अरविन्द जैन ने जानकारी दी कि प्रसाद वितरण और 56 भोग का लाभ क्रमश: जगदीश समदानी, कैलाश समदानी एवं पवन रुणवाल, पंकज रुणवाल तथा वैभव रुणवाल परिवार द्वारा लिया गया। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में समिति के अनेक पदाधिकारियों और सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।

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