भीलवाड़ा में शिवमहापुराण कथा के दूसरे दिन स्वामी निर्मल दास ने सुनाया शिव महिमा का प्रसंग
भीलवाड़ा के हरि शेवा आश्रम में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित धार्मिक उत्सव के दौरान स्वामी डॉ. निर्मल दास ने शिवलिंग की उत्पत्ति का महत्व समझाया।

भीलवाड़ा के हरि शेवा उदासीन आश्रम में आयोजित शिवमहापुराण कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते कथाव्यास स्वामी डॉ. निर्मल दास जी महाराज।
भीलवाड़ा में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा महोत्सव का द्वितीय दिवस आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा के गहन वातावरण में संपन्न हुआ। महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसराम जी उदासीन महाराज के सान्निध्य तथा सनातन सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कथा में उदासीन संस्कृत विद्यालय, काशी (उत्तर प्रदेश) के प्रख्यात कथाव्यास स्वामी डॉ. निर्मल दास जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।
कथा व्यास स्वामी डॉ. निर्मल दास जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि शिवमहापुराण का श्रवण मानव जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार की दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि जीवन नश्वर है और यह एक धर्मशाला के समान है, जहां जीव अल्पकाल के लिए ठहरता है, इसलिए इसे ईश्वर भक्ति और परोपकार में समर्पित करना चाहिए। उन्होंने पुरुषोत्तम मास को पुण्य अर्जन का दुर्लभ अवसर बताते हुए श्रद्धालुओं से सत्संग और भक्ति में मन लगाने का आह्वान किया।
स्वामी जी ने शिवमहापुराण की आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि कलियुग में सत्संग और संतों का सान्निध्य ही मोक्ष का सरल मार्ग है। उन्होंने शिवलिंग की उत्पत्ति और ब्रह्मा-विष्णु के मध्य हुए श्रेष्ठता विवाद का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव एक अनंत ज्योति स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे, जिसका न आदि था न अंत, जिससे उनकी परम श्रेष्ठता सिद्ध हुई।
कथा के दौरान भक्ति गीतों और “हर-हर महादेव” के जयघोषों से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भजन कीर्तन में भाग लेते हुए भावविभोर होकर नृत्य किया। इस अवसर पर महा आरती का आयोजन भी किया गया, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
इससे पूर्व प्रातःकाल श्री विष्णु यज्ञ का आयोजन हुआ, जिसमें कन्हैया मोरयानी, हरीश-निशा आडवाणी, राजा-वर्षा टिक्यानी, रमेश मूंदड़ा एवं हनुमान प्रसाद अग्रवाल सहित श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कर विश्व शांति एवं जनकल्याण की कामना की। आश्रम के संत माया रामजी और संत गोविंद राम ने जानकारी दी कि प्रतिदिन सायंकाल काशी की तर्ज पर भव्य गंगा आरती, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं अखंड रामधुन का आयोजन किया जा रहा है।
यह संपूर्ण आयोजन पुरुषोत्तम मास के दौरान आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक आस्था के पुनर्जागरण का केंद्र बनता जा रहा है, जहां श्रद्धालु निरंतर भक्ति और सत्संग के माध्यम से आत्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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