भीलवाड़ा: संकटमोचन हनुमान मंदिर में 1100 किलो काजूकतली का महाभोग लगा
हनुमान जयंती पर स्वर्ण चोला श्रृंगार और महाआरती के बाद 11 किलो का केक काटा गया, विधायक अशोक कोठारी सहित हजारों श्रद्धालु उत्सव में शामिल हुए।

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा शहर के मुख्य डाकघर के समीप स्थित श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर में गुरुवार को भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त श्री हनुमानजी महाराज का जन्मोत्सव अपार उत्साह और भक्ति भावना के साथ संपन्न हुआ। हनुमान जयंती के इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां सुबह हनुमानजी की प्रतिमा को स्वर्ण चोला चढ़ाकर विशेष श्रृंगार किया गया। दोपहर 12.15 बजे मंदिर के महंत बाबूगिरीजी महाराज के सानिध्य में महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें सम्मिलित होने हेतु बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए। इस भक्तिमय आयोजन का मुख्य आकर्षण हनुमानजी को लगाया गया 1100 किलो केसरयुक्त काजूकतली का महाभोग रहा। इसके अतिरिक्त, बाल हनुमान का रूप धरे एक बालक के हाथों 11 किलो का केक कटवाकर जन्मोत्सव की खुशियां मनाई गईं, जिससे पूरा वातावरण जय श्रीराम और हनुमानजी के जयकारों से गूंज उठा।
इस भव्य समारोह में भीलवाड़ा विधायक एवं श्री शिव महापुराण कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष अशोक कोठारी, कार्याध्यक्ष राधेश्याम सोमानी, सुनील जागेटिया, गजानंद बजाज सहित कई विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंदिर ट्रस्टी महावीरप्रसाद अग्रवाल एवं रमेश बंसल ने जानकारी दी कि महाआरती से पूर्व ही दर्शनार्थियों का तांता लग गया था। महाभोग के पश्चात काजूकतली प्रसाद का वितरण सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं, जहां लंबी कतारों में लगे भक्तों को कार्यकर्ताओं द्वारा सुव्यवस्थित ढंग से प्रसाद वितरित किया गया। महोत्सव के उपलक्ष्य में संपूर्ण मंदिर परिसर को मनमोहक फूलों और भव्य विद्युत रोशनी से सजाया गया, जो आकर्षण का केंद्र बना रहा।
हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में भक्ति का यह क्रम पूर्व संध्या से ही प्रारंभ हो गया था। शनिवार रात मंदिर के बाहर श्री बालाजी सत्संग मंडल के एसके खंडेलवाल एवं साथियों द्वारा संगीतमय सुंदरकांड पाठ की प्रस्तुति दी गई। महंत बाबूगिरीजी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सुंदरकांड की चौपाइयों के माध्यम से हनुमान भक्ति का रसास्वादन किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक बना, बल्कि शहर की एकता और अटूट आस्था को भी रेखांकित कर गया।

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