संजय कॉलोनी स्थित श्री चारभुजा मंदिर में इन दिनों भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। श्री चारभुजा मंदिर सेवा समिति एवं महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित 26वें पाटोत्सव के उपलक्ष्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस अत्यंत दिव्य और प्रेरणादायी रहा। कथा व्यास आचार्य शक्ति देव जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान के विभिन्न अवतारों और लीलाओं का सजीव चित्रण करते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रस से सराबोर कर दिया।

कथा का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ, जिसमें आचार्य ने श्रीमद्भागवत को मानव जीवन का पथप्रदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि यह कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण का जीवन पद्धति है। कथा के मुख्य प्रसंग में भक्त प्रहलाद का चरित्र वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि असुर कुल में जन्म लेने के बावजूद प्रहलाद की अटूट निष्ठा भगवान विष्णु के प्रति रही। विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित न होना ही सच्ची भक्ति की पहचान है। रामावतार प्रसंग में आचार्य ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के त्याग, सत्य और कर्तव्यपरायणता को समाज के लिए आदर्श बताया। कथा के दौरान 'भए प्रकट कृपाला' और 'तुम उठो सिया श्रृंगार करो' जैसे भजनों ने पांडाल को भक्तिमय बना दिया, वहीं राम-सीता की मनोहारी झांकी ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

राजा बलि और वामन अवतार की कथा सुनाते हुए महाराज ने दान की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि अहंकार पतन की सीढ़ी है, जबकि दान आत्मशुद्धि का माध्यम है। कथा का सबसे भावपूर्ण क्षण श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग रहा। कंस के अत्याचारों से मुक्ति और धर्म की स्थापना के लिए श्रीकृष्ण के प्राकट्य का वृत्तांत सुनकर पांडाल 'नंद के आनंद भयो' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इस दौरान वासुदेव और बालकृष्ण की आकर्षक झांकी सजाई गई, जिसने नंदोत्सव के उल्लास को साकार कर दिया।

कार्यक्रम के अंत में भगवान की महाआरती की गई और संजय एवं साहिल सुराना परिवार द्वारा प्रसाद वितरण किया गया। समिति के अध्यक्ष जगदीश देवपुरा और मंत्री अरविन्द जैन ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। आयोजन को सफल बनाने में दिनेश मालीवाल, रामराय गट्टानी, रमेश काबरा, कैलाश पोखरा समेत समिति के समस्त सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में, बल्कि समाज में आदर्शों और मूल्यों को पुनः स्थापित करने के एक सार्थक प्रयास के रूप में भी मील का पत्थर साबित हो रहा है।

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