भीलवाड़ा: पीथास में गूंजेगा सनातन का शंखनाद, विशाल हिंदू सम्मेलन की तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं ने भरी हुंकार
भीलवाड़ा के मांडल स्थित पीथास ग्राम में 1 फरवरी को आयोजित होने वाले विशाल हिंदू सम्मेलन को लेकर कार्यकर्ताओं ने कसी कमर। तेरापंथ भवन में हुई बैठक में बनी ठोस रणनीति, पीथास सहित 10 गांवों में पीले चावल देकर दिया जाएगा न्योता। कलश यात्रा और ठाकुर जी के बेवाण की भव्य शोभा यात्रा बनेगी आकर्षण का केंद्र। जानें कौन-कौन संभाल रहा है सम्मेलन की जिम्मेदारी और क्या है पूरी योजना।

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की मांडल तहसील अंतर्गत पीथास ग्राम की धरा आगामी 1 फरवरी को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक समागम की साक्षी बनने जा रही है। इस प्रस्तावित विशाल हिंदू सम्मेलन को लेकर क्षेत्र के हिंदू समाज में अभूतपूर्व उत्साह का संचार हो रहा है। इसी तारतम्य में स्थानीय तेरापंथ भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं के जोश और रणनीतिक कौशल ने सम्मेलन की सफलता की मजबूत आधारशिला रख दी है। यह बैठक केवल एक चर्चा का केंद्र नहीं रही, बल्कि इसने गांव-गांव तक हिंदू एकता और सांस्कृतिक जागरण का संदेश पहुंचाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार कर दिया है।
बैठक की गरिमा मुख्य अतिथि नरपत सिंह राठौड़, गोपाल सेन एवं विश्वनाथ प्रताप सिंह के सानिध्य में और बढ़ गई, जिन्होंने अपने उद्बोधन से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए सर्वसम्मति से एक सशक्त कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें संयोजक के रूप में गोपाल तोलंबिया, सह संयोजक नारायण लाल तेली, अध्यक्ष केसु लाल सुवालका, सचिव सुरेश चंद्र पारीक एवं कोषाध्यक्ष के रूप में कमलेश पारीक को महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपे गए। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन किसी औपचारिकता मात्र के लिए नहीं, बल्कि हिंदू समाज की अटूट शक्ति, एकता और सनातन मूल्यों के पुनरुत्थान का एक जीवंत प्रतीक बनेगा।
रणनीति के तहत इस भव्य आयोजन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यकर्ता पीथास के साथ-साथ मालीखेड़ा, अमरगढ़ नई-पुरानी, लसाड़िया, चतुर्भुजपुरा, समरथपुरा, मालपुरा, करनवास, माणक्यास, सारणों का खेड़ा एवं हमीरपुरा जैसे अनेक गांवों में सघन संपर्क अभियान चलाएंगे। पारंपरिक मर्यादाओं का निर्वहन करते हुए घर-घर जाकर पीले चावल बांटकर समाज के हर वर्ग को इस धर्मसभा में आमंत्रित किया जाएगा। आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य सम्मेलन से पूर्व एक भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें मातृशक्ति की भागीदारी प्रमुख होगी। साथ ही, महापुरुषों की सजीव झांकियां और दस गांवों के आराध्य ठाकुर जी के बेवाण की विशाल शोभा यात्रा पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर देगी।
यह शोभा यात्रा मांडल के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए सनातन गर्व का उद्घोष करेगी और अंततः सम्मेलन स्थल पर एक विशाल धर्मसभा में परिवर्तित हो जाएगी। कार्यक्रम का समापन सामूहिक महाप्रसादी के साथ होगा, जो सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और ग्रामीण स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता इस आयोजन को अनुशासित और ऐतिहासिक बनाने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। बैठक के समापन पर सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ कर सभी उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि वे अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा हेतु इस आयोजन को अभूतपूर्व सफलता दिलाएंगे।

Pratahkal Bureau
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