भीलवाड़ा: सनातन मंगल महोत्सव में आज निकलेगी भव्य संत दर्शन शोभायात्रा
हरि शेवा उदासीन आश्रम के दीक्षा दान समारोह के सातवें दिन तीन दीक्षार्थियों की नगर परिक्रमा होगी, जिसमें देशभर के प्रख्यात संत और झांकियां शामिल रहेंगे।

भीलवाड़ा के हरि शेवा उदासीन आश्रम द्वारा आयोजित सनातन मंगल महोत्सव के सातवें दिन बुधवार को निकलने वाली शोभायात्रा में शामिल होने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
भीलवाड़ा, 24 फरवरी। हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर भीलवाड़ा के तत्वावधान में आठ दिवसीय सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह के सातवें दिन बुधवार को भीलवाड़ा में संत दर्शन एवं सनातन शोभायात्रा का आयोजन होगा। इसके माध्यम से दीक्षा लेने जा रहे तीनों दीक्षार्थियों की नगर परिक्रमा होगी। इस आयोजन के माध्यम से संत दर्शन के साथ सनातन एकता की झलक भी दिखेगी।
शोभायात्रा का कार्यक्रम एवं भव्यता
- बुधवार को प्रात: 8 बजे भीलवाड़ा के अयोध्यानगर (दूधाधारी मंदिर) से शोभायात्रा प्रारंभ होगी।
- इसमें दीक्षार्थी बंधुओं, संत महापुरूषों के साथ नगर प्रभात फेरी मण्डलियां शामिल होगी।
- शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु भाई बहन शामिल होकर सनातन एकता प्रदर्शित करेंगे।
- यह यात्रा नगर परिक्रमा करते हुए हरि शेवा धाम पहुंचकर सम्पन्न होगी।
- शोभायात्रा में नासिक, जम्मू, उड़ीसा की ढोल वाली टीमों के साथ शिव बारात व उज्जैन से महाकाल की टीम भी होगी।
महामंडलेश्वर स्वामी गुरूशरणानंद महाराज का आगमन
शोभायात्रा में उदासीन कार्ष्णि पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी गुरूशरणानंद महाराज रमणरेती गोकुल वन मथुरा सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संत महात्माओं का सानिध्य मिलेगा। गुरूशरणानंद महाराज के मंगलवार को हेलिकॉप्टर से भीलवाड़ा पहुंचने पर हरि शेवा उदासीन आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज सहित कई संत महात्माओं ने भव्य स्वागत किया।
महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने बताया कि:
"दीक्षार्थी इन्द्रदेव, सिद्धार्थ एवं कुनाल की नगर परिक्रमा शोभायात्रा को लेकर भीलवाड़ा में उत्साह का माहौल है ओर नजारा अयोध्या जैसा प्रतीत हो रहा है। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए है ओर भीलवाड़ावासी सर्व सनातनी इस आयोजन में शामिल होने के लिए आतुर है।"
आगामी दीक्षा दान एवं समष्टि भण्डारा
- 26 फरवरी को सुबह 9 बजे से हरि शेवा आश्रम परिसर में दीक्षा दान समारोह का भव्य आयोजन होगा।
- दोपहर 1 बजे से "एक संगत- एक पंगत- एक भाषा-एक भूषा" के साथ विशाल समष्टि भण्डारे का आयोजन अग्रवाल उत्सव भवन (रोडवेज बस स्टैंड के सामने) में होगा।
श्रीमद् भागवत कथा: रासलीला एवं रूक्मणी विवाह
सनातन मंगल महोत्सव के तहत श्रीमद भागवत महापुराण कथा के छठे दिन व्यास पीठ पर विराजित श्रीधाम वृन्दावन के कथा व्यास डॉ. श्यामसुन्दर पाराशर के मुखारबिंद से रासलीला एवं रूक्मणी विवाह प्रसंग का वाचन हुआ।
डॉ. पाराशर ने रासलीला का महत्व समझाते हुए कहा कि:
"जीवात्मा ओर परमात्मा के दिव्य मिलन का नाम रास है। रास के माध्यम से भगवान अपने रसिकों को रसास्वादन कराते है। भोल बाबा शिव भी रास का आनंद लेने के लिए गोपी के रूप में आते है। जो भी कृष्ण दर्शन की आस रखते है उन्हें रात में सोने से पहले गोपी गीत का पाठ करना चाहिए। वियोग के बिना संयोग का महत्व नहीं ओर विरह के बिना मिलन का सुख नहीं होता है।"
उन्होंने आगे कहा कि:
"भगवान की कथा का अमृत पीने से जीवन के सारे संताप नष्ट हो जाते है ओर सभी तनाव दूर होते है। जो भगवान की कथा सुना भक्त के ह्दय में हरि विराजित कर दे उस वक्ता से बड़ा महादानी कोई नहीं हो सकता।"
संस्कार, सेवा और संस्कृति पर उद्बोधन
डॉ. पाराशर ने माता-पिता की सेवा और प्राचीन शिक्षा पद्धति पर जोर दिया:
- "माता-पिता संतान के लिए अपने सारे सुख ओर पूरा जीवन समर्पित कर देते है लेकिन दुर्भाग्य से संतानों के पास उनकी सेवा के लिए समय ही नहीं होता। जीवन में अपने दाता ओर उपकारी को कभी नहीं भूलना चाहिए।"
- "सर्व समावेशी प्राचीन भारतीय गुरूकुलों की स्थापना के बिना भारतीय संस्कृति का पुनरूत्थान नहीं हो सकता। गुरूकुल की शिक्षा संस्कार देने वाली थी। लोक ओर परलोक दोनों को सुखी बनाना चाहते है तो ऋषियों के बताए मार्ग पर चलना होगा।"
उत्सव और आरती
रूक्मणी विवाह प्रसंग के दौरान भगवान कृष्ण ओर रूक्मणी विवाह की सजीव झांकी सजाई गई। विवाह प्रसंग के अवसर पर पांडाल में उल्लास का माहौल छा गया ओर मंच पर संतों ने भगवान कृष्ण संग फूलों की होली खेली। कथा के दौरान "गोपी संग राधा नाचे कृष्ण नाचे", "आज दुल्हा बने नंदलाल" जैसे भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमते रहे ओर भगवान के जयकारे गूंजायमान होते रहे। कथा के छठे दिवस के विश्राम पर व्यास पीठ की आरती करने वालों में कई संत महात्मा शामिल थे। इनके साथ भीलवाड़ा के विभिन्न समाजों एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, सनातन सेवा समिति एवं हंसगं…

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