भीलवाड़ा: बापू नगर स्थित श्री संभवनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर में दो दिवसीय वार्षिक ध्वजा महोत्सव
भीलवाड़ा के बापू नगर स्थित श्री संभवनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर में 16वां वार्षिक ध्वजा महोत्सव 18 और 19 जून को आयोजित होगा। भक्ति संध्या, भव्य वरघोड़ा और विशेष पूजा अनुष्ठानों से सजे इस धार्मिक उत्सव में सम्मिलित होने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह है।

भीलवाड़ा के बापू नगर स्थित श्री संभवनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर में 16वें वार्षिक ध्वजा एवं मंदिर वर्षगांठ महोत्सव हेतु की गई विशेष अंगरचना।
भीलवाड़ा के बापू नगर स्थित श्री संभवनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर में 16वें वार्षिक ध्वजा एवं मंदिर वर्षगांठ महोत्सव का भव्य आयोजन आगामी 18 जून से भक्ति और श्रद्धा के साथ आरंभ होने जा रहा है। मेवाड़ देशोद्धारक आचार्य श्रीजितेन्द्र सूरिश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न आचार्य श्री निपूणरत्न विजय सूरिश्वरजी म.सा. एवं पूज्य राजरत्न विजयजी म.सा. के पावन आशीर्वाद से आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय महोत्सव को लेकर मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। आध्यात्मिक अनुष्ठानों और सामूहिक कार्यक्रमों से सुसज्जित यह आयोजन धार्मिक आस्था का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
महोत्सव के प्रथम दिन 18 जून को संध्याकालीन आरती और भव्य अंगरचना दर्शन के उपरांत भक्ति संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर नीमच के प्रसिद्ध संगीतकार महावीर जैन एंड ग्रुप अपनी टीम के साथ सुमधुर भजनों के माध्यम से प्रभु भक्ति का संचार करेंगे। साथ ही, भीलवाड़ा के गायक गोविन्द गुरावा द्वारा भी आध्यात्मिक भजनों की मनभावन प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिसे लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह व्याप्त है।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण 19 जून को संपन्न होगा। इस दिन प्रातः 6:30 बजे कायमि ध्वजा के लाभार्थी बापना परिवार के निवास से मंदिर तक एक भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा। तत्पश्चात, प्रातः 8:15 बजे स्नात्र पूजा एवं वार्षिक ध्वजा महोत्सव का अनुष्ठान होगा। प्रातः 9 बजे से आयोजित होने वाले वार्षिक चढ़ावा कार्यक्रम के पश्चात लाभार्थी परिवार की ओर से साधार्मिक स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष कायमि ध्वजा का लाभ धर्मनिष्ठ प्रभादेवी, मनीष-ममता, प्रणय एवं प्रियांश बापना परिवार को प्राप्त हुआ है। मंदिर समिति के अध्यक्ष मनीष बापना और मंत्री दिनेश गोलेछा ने समाज के सभी सदस्यों एवं श्रद्धालुओं से इस पावन आयोजन में सपरिवार सम्मिलित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। यह वार्षिक उत्सव न केवल मंदिर की गौरवशाली परंपरा का निर्वहन करता है, बल्कि श्रद्धालुओं के बीच भक्ति और एकता के सूत्र को भी सुदृढ़ करता है।

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