शहर के बापूनगर स्थित श्री संभवनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर में आयोजित 16वें वार्षिक ध्वजा एवं मंदिर वर्षगांठ महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार रात भव्य भक्ति संध्या के साथ हुआ। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण इस आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु तीर्थंकर परमात्मा की आराधना में भावविभोर होकर देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे।

मेवाड़ देशोद्धारक आचार्य श्री जितेन्द्र सूरिश्वरजी महाराज के शिष्यरत्न आचार्य श्री निपूणरत्न विजय सूरिश्वरजी महाराज एवं पूज्य राजरत्न विजयजी महाराज की प्रेरणा और पावन आशीर्वाद से आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव की शुरुआत साध्यंकालीन आरती के साथ हुई। आरती के पश्चात तीर्थंकर विमलनाथ भगवान, तीर्थंकर संभवनाथ भगवान तथा नाकोड़ा भैरव देव की भव्य अंगरचना के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

सर्व मंगलकारी नवकार महामंत्र की आराधना से प्रारंभ हुई भक्ति संध्या में नीमच के प्रसिद्ध जैन संगीतकार महावीर जैन एंड ग्रुप तथा भीलवाड़ा के गोविंद गुरावा ने प्रभु भक्ति से ओतप्रोत भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। गोविंद गुरावा ने नवकार मंत्र के साथ कार्यक्रम का आगाज करते हुए “जहां नेमि के चरण पड़े” और “पारस प्यारो लागे” जैसे भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इसके बाद मंच पर पहुंचे प्रसिद्ध संगीतकार महावीर जैन का श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। उन्होंने “दुनिया में देव अनेकों है, तीर्थंकर प्रभु का क्या कहना”, “चिंतामणि म्हारी चिंता चूर”, “विश्वास कर दादा पे”, “मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे” सहित अनेक लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भक्तों की विशेष मांग पर प्रस्तुत किए गए “बोल बोल आदिश्वर वाला” और “भक्ति की है रात” जैसे भजनों ने पूरे पंडाल को भक्ति के रंग में रंग दिया। महावीर जैन के साथ सहगायक विष्णु वैष्णव और कुलदीप गुगलिया ने भी अपनी प्रस्तुतियों से आयोजन को यादगार बनाया।

मंदिर समिति के अध्यक्ष मनीष बापना सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों और श्रद्धालुओं का स्वागत किया। मंदिर परिसर को घी के दीपकों से आकर्षक रूप से सजाया गया था, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक आभा का संचार हो रहा था। तीर्थंकर विमलनाथ भगवान, तीर्थंकर संभवनाथ भगवान एवं नाकोड़ा भैरव देव की भव्य अंगरचना के निर्माण में दिनेश गोलेछा, संजय लोढ़ा, श्रेयांश गुगलिया, गार्गी खाब्या, लक्की खाब्या, सिदिक्षा खाब्या और यशस्वी खाब्या का विशेष सहयोग रहा।

मंदिर समिति के मंत्री दिनेश गोलेछा ने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत परमात्मा की भव्य अंगरचना एवं आरती के चढ़ावे भी श्रद्धापूर्वक लिए गए। आयोजन को सफल बनाने में मंदिर समिति के पदाधिकारी एवं समाजजनों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि शुक्रवार को मंदिर का 16वां वार्षिक ध्वजा एवं मंदिर वर्षगांठ महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर कायमि ध्वजा का लाभ धर्मनिष्ठ प्रभादेवी, मनीष-ममता, प्रणय एवं प्रियांश बापना परिवार द्वारा लिया जाएगा। सुबह 6:30 बजे बापना परिवार के निवास से मंदिर तक भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा, जिसके बाद स्नात्र पूजा, ध्वजा महोत्सव तथा वार्षिक चढ़ावा कार्यक्रम आयोजित होंगे।

आयोजन समिति ने समाज के सभी सदस्यों और श्रद्धालुओं से महोत्सव में सहभागिता कर प्रभु भक्ति एवं धर्म प्रभावना का लाभ प्राप्त करने की अपील की है। भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह आयोजन जैन समाज की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक आस्था का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है।

Pratahkal Bureau

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