भीलवाड़ा, 9 मार्च। सनातन संस्कृति केवल परंपराओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है जिसकी जड़ें आध्यात्मिकता में गहराई से समाई हुई हैं। आध्यात्मिकता के माध्यम से ही सनातन संस्कृति की रक्षा, पुनर्स्थापना और प्रसार संभव है। इसी पावन भावना के साथ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के भीलवाड़ा पथिकनगर केंद्र के तत्वावधान में आगामी 15 मार्च को एक विशाल 'साधु संत महासम्मेलन' का भव्य आयोजन किया जा रहा है।

महासम्मेलन का स्वरूप और उद्देश्य

विजयसिंह पथिकनगर स्थित अग्रवाल भवन में सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित होने वाले इस महासम्मेलन को लेकर व्यापक तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं। इस गरिमामयी आयोजन में ऋषिकुल धाम जोधपुर के आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. श्री शिव स्वरूपानंदजी महाराज, सहारनपुर से आचार्य महामंडलेश्वर कमलकिशोरजी महाराज, हरिशेवाधाम भीलवाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसारामजी उदासीन, ब्रह्माकुमारी प्रयागराज की धार्मिक प्रभाग अध्यक्ष राजयोगिनी ब्रह्माकुमारीज मनोरमा दीदी एवं ब्रह्माकुमारीज माउंट आबू के धार्मिक प्रभाग मुख्यालय संयोजक ब्रह्माकुमार रामनाथ भाई का पावन सानिध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की भीलवाड़ा केंद्र प्रभारी बीके इंदिरा दीदी ने जानकारी दी कि संतों द्वारा आशीर्वचन के पश्चात राजयोगी युगलों का विशेष सम्मान किया जाएगा। समारोह का मुख्य आकर्षण राजयोगानुभूति के माध्यम से सुखी एवं तनाव रहित जीवन के सूत्रों का प्रतिपादन होगा। इस विशिष्ट कार्यक्रम में भीलवाड़ा जिले के विभिन्न धर्म स्थलों की सेवा एवं पूजा कार्य करने वाले संत, महात्मा, पुजारी और पंडित सम्मिलित होंगे। इसके माध्यम से उन्हें यह बोध कराया जाएगा कि किस प्रकार आध्यात्मिकता के सशक्त संबल से सनातन संस्कृति की रक्षा का महती कार्य सिद्ध किया जा सकता है। भीलवाड़ा में पहली बार हो रहे इस अनूठे आयोजन को लेकर सनातन धर्म के आधार को समझने वाले संत समाज और विद्वत वर्ग में भारी उत्साह का संचार है। ब्रह्माकुमारीज केंद्र के सदस्य निरंतर संपर्क कर उन्हें सहभागिता हेतु प्रेरित कर रहे हैं।

महासम्मेलन में पधार रहे विशिष्ट अतिथियों का परिचय

आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. शिव स्वरूपानंदजी महाराज: आप ऋषिकुल धाम जोधपुर के पीठाधीश्वर होने के साथ-साथ श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महामंडलेश्वर हैं। आप भारतीय युवा साधु संगठन के अध्यक्ष, विरक्त सन्यासी परिषद के उपाध्यक्ष और विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय सलाहकार का उत्तरदायित्व संभाल रहे हैं। साथ ही आप हिंदू धर्म आचार्य सभा, हिंदू धर्म संसद एवं धर्म रक्षा मंच के भी सक्रिय सदस्य हैं।

संत कमलकिशोरजी महाराज: आपको एक ऐसे जीवंत गुरु के रूप में जाना जाता है जिनसे "प्रेम से परिपूर्ण समर्पण के साथ संपर्क में आते ही शारीरिक, मानसिक, आत्मिक एवं आध्यात्मिक बाधाएं अपने आप समाप्त होने लगती हैं।" वह मानते हैं कि उनके पास देने के लिए मात्र प्रेम है और इंसान वही दे सकता है जो उसके पास होता है। आप आयुर्वेद के ज्ञाता होने के साथ-साथ विभिन्न धर्म ग्रंथों एवं महापुरुषों के जीवन के गहरे अध्येता हैं।

ब्रह्माकुमार रामनाथ भाई: माउंट आबू स्थित मुख्यालय में धार्मिक सेवा प्रभाग के संयोजक के रूप में कार्यरत रामनाथ भाई ने भारतीय दर्शन एवं विश्व के विभिन्न धर्मों का गहन अध्ययन किया है। आप वर्ष 1990 से निरंतर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलनों का सफल संपादन कर रहे हैं और राजयोग मेडिटेशन द्वारा विश्व शांति के लिए समर्पित हैं।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसारामजी उदासीन: हरिशेवा धाम भीलवाड़ा के स्वामी जी "एक संगत, एक पंगत, एक भेष और एक भूषा" की संकल्पना के साथ जातिगत भेदभाव मिटाकर सनातनियों को संगठित कर रहे हैं। इसी ध्येय की प्राप्ति हेतु हाल ही में भीलवाड़ा में 19 से 26 फरवरी तक भव्य 'सनातन मंगल महोत्सव' का सफल आयोजन आपके नेतृत्व में संपन्न हुआ था।

राजयोगिनी ब्रह्माकुमारीज मनोरमा दीदी: प्रयागराज केंद्र की प्रभारी मनोरमा दीदी ने "राजयोग जैसे गहन विषय को सरल व वैज्ञानिक पद्धति से समझाते हुए देश-विदेश के अनेक लोगों को जीवन जीने की सही पद्धति का ज्ञान प्रदान किया है।" आपके दिव्य व्यक्तित्व से प्रेरित होकर अनगिनत जिज्ञासु आध्यात्मिकता की गहराइयों से जुड़े हैं।

Pratahkal Bureau

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