भीलवाड़ा: रूपाहेली गांव में बलाई समाज के सामाजिक बहिष्कार का मामला, मुख्यमंत्री को ज्ञापन
भीलवाड़ा के रूपाहेली गांव में बलाई समाज के खिलाफ सुनाया गया अमानवीय फरमान, हुक्का-पानी बंद करने के साथ ही राशन और दवाइयों पर लगी रोक। पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल, क्या न्याय मिल पाएगा? जानिए इस पूरी घटना का विस्तृत विवरण।

भीलवाड़ा जिले के रूपाहेली गांव से एक अत्यंत विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने सामाजिक समरसता की नींव को झकझोर कर रख दिया है। गांव में दबंगों द्वारा बलाई समाज के लोगों का पूर्ण सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार किए जाने का मामला प्रकाश में आया है, जिसके कारण पूरा समाज अमानवीय परिस्थितियों में जीने को मजबूर है। बलाई समाज नवयुवक सेवा समिति ने इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है।
इस विवाद की जड़ें मार्च 2026 में हुए एक घटनाक्रम में निहित हैं। आरोप है कि गांव के कुछ प्रभावशाली तत्वों ने सार्वजनिक बैठक आयोजित कर बलाई समाज के लोगों को हनुमान जी के मंदिर में होने वाले धार्मिक आयोजनों से बहिष्कृत करने का फरमान जारी किया था। जब समाज ने इसके विरोध में कार्यक्रमों से दूरी बनाने का निर्णय लिया, तो प्रतिशोध स्वरूप दबंगों ने उनके विरुद्ध एक अमानवीय अभियान छेड़ दिया।
स्थिति की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बलाई समाज के लोगों के लिए दैनिक जीवन की मूलभूत सुविधाएं भी बंद कर दी गई हैं। गांव में समाज के लोगों द्वारा संचालित दुकानों को जबरन बंद करवाया गया है। किराना व्यापारियों को उन्हें राशन न बेचने की सख्त चेतावनी दी गई है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बीमार होने की स्थिति में मेडिकल स्टोर से दवाइयां देने तक पर रोक लगा दी गई है। गांव के अन्य निवासियों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी ने बलाई समाज की मदद करने का प्रयास किया, तो उसे भी बहिष्कृत कर दिया जाएगा।
ज्ञापन में बलाई समाज के पदाधिकारियों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, जातिसूचक गालियों का प्रयोग और मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का दावा है कि स्थानीय सदर पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके चलते आरोपियों के हौसले बुलंद हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बलाई समाज के प्रबुद्धजनों ने राजस्थान सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक को इस प्रकरण की तत्काल जांच के निर्देश दिए जाएं। उन्होंने आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी और पीड़ित परिवारों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। यह घटना न केवल संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि सभ्य समाज के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न भी है।

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