भीलवाड़ा: सड़क सुरक्षा सप्ताह को ठेंगा दिखाता मौत का तांडव, मेगा हाईवे पर ट्रक की चपेट में आने से युवक की मौत
भीलवाड़ा में सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान शाहपुरा मेगा हाईवे पर भीषण हादसा, ट्रक की टक्कर से युवक राहुल नायक की मौत। हादसे में बहन खुशबू नायक और मां गंभीर रूप से घायल, भीलवाड़ा रेफर। बडेसरा चौराहे पर हुए इस दर्दनाक हादसे ने प्रशासन के दावों और सड़क सुरक्षा सप्ताह की प्रभावशीलता पर उठाए गंभीर सवाल। जानें पूरी खबर और हादसे के पीछे की लापरवाही।

भीलवाड़ा। एक तरफ जहां प्रशासन 'सड़क सुरक्षा सप्ताह' के जरिए आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले की सड़कों पर बेलगाम दौड़ते वाहन काल बनकर निर्दोषों की जिंदगी छीन रहे हैं। भीलवाड़ा में जागरूकता अभियानों के दावों की पोल उस वक्त खुल गई जब शाहपुरा थाना क्षेत्र के जयपुर–कांकरोली मेगा हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ कर रख दिया। नए साल के आगाज पर बिगोद में हुए दर्दनाक हादसे के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि बडेसरा चौराहे के पास हुए इस ताजा घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
घटनाक्रम के अनुसार, जयपुर–कांकरोली मेगा हाईवे पर बडेसरा चौराहे के समीप भीलवाड़ा की ओर से तेज गति में आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने एक बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भयावह थी कि बाइक पर सवार मां, बेटी और पुत्र सड़क पर दूर जा गिरे और लहूलुहान हो गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों के बीच चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों की सक्रियता से तत्काल 108 एंबुलेंस को सूचित किया गया, जिसके माध्यम से तीनों घायलों को उपचार के लिए शाहपुरा जिला चिकित्सालय ले जाया गया।
अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे राहुल नायक ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई राहुल की बहन खुशबू नायक और उनकी मां की नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए भीलवाड़ा रेफर कर दिया है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और दुर्घटना का कारण बने ट्रक को जब्त कर थाने भिजवाया। पुलिस ने मृतक राहुल नायक के शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाकर परिजनों को सूचित कर दिया है।
यह दुर्घटना केवल एक संयोग नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति करने वाली व्यवस्था पर एक करारा प्रहार है। स्थानीय निवासियों का आक्रोश इस बात पर है कि केवल एक सप्ताह अभियान चला देने से सड़कें सुरक्षित नहीं होंगी। जब तक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक ऐसे रक्तपात को रोकना असंभव प्रतीत होता है। राहुल की मौत ने एक बार फिर यह कड़वा सच उजागर कर दिया है कि जागरूकता के नारों के बीच सड़कों पर बिछा मौत का जाल अब भी बदस्तूर जारी है।

Pratahkal Bureau
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